भारत की सबसे volatile प्रजाति गर कोई है तो वो हैं भूमिहार। पूँजीवाद समाजवाद मरकसियावाद ससुरा जो नया दिखा बिना जाँच पडताल के उसमें अपना चोंच घुसायेंगे ,खून पसीना बहायेंगे चाहे वो वाद इनकी ही बैण्ड बजाने वाला क्यों न हो और जब उस वाद रूपी पौधे को सींच कर ये बडा कर देंगे और फल लेने का समय आयेगा तो इन्हें मिलता है बाबा जी का ढुल्लू ।

शुरू से यही होता आया है किन्तु हम कहाँ चेतने वाले है ससुरा जीन जो सामाजिक है। अरे भैया हमारे पुरखे सामाजिक राष्ट्रवादी थे किन्तु पहले साधना स्वाध्याय के द्वारा उन्होने खुद को वैसा बनाया था किन्तु तुम जैसे ही आगे बढने को पहला पायदान पार करते हो लालच , काम क्रोध मद मोह आदि के चंगुल में फंस जाते हो फिर जहाँ से शुरू किये थे उस से भी १०० पायदान नीचे और वंश कुल गोत्र पुरखों का नाम मिट्टी में मिलाया वो अलग। जब तक खुद सधे नहीं हो खाली हो तब तक समाज को क्या घण्टा दोगे ?
जह्वा मांस मदिरा त्याग किये बगैर रहेगी नहीं, वाणी संयमित है नही, विलायती गर्लफेण्ड के सपने देखोगे, विदेशों में बसने के ख्वाब और भारत में खोजोगे परुखों सा रोआब तो कैसे होगा। पुरखो में दिनकर ने तो लिख भी दिया है क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो। अरे पहले क्षमा करने लायक तो बनो । सामर्थ है नहीं और मुँह चिहार रहे ब्राह्मण धर्म का पालन करते हुए क्षमा किया, वरना क्या कर लेते बे ? अभिसार शर्मा operation bhumihar चला के सबको खुलेआम चैलेञ्ज कर तो रहा है क्या उखाड लिया उसका जाओ उखाडो, ?पथरा इंगलिश में क्या उखाडा ?लालू एक भी बाभन को टिकट दिए बगैर सत्ता में है क्या उखाड लिया उसका ?
ससुरे तुम कुक्कुर के भाँति पूँछ हिलाओ रोटी देख के कभी इधर कभी उधर, आपस में उन्हीं के तरह लडो और जब को ताकतवर हाथी सामने आ जाए तो दूर से भौंको ~ भों भों भों और जब नजदीक आए दुम दबा के भाग लो। सताओगे किसे ? गाँव में गर कोई गरीब जो तुम्हारा खेत जोतता है गर कुछ गलती कर दे तब तुम वहाँ ससुरे एेसे बन जाओगे जैसे साक्षात् सम्राट समुद्रगुप्त तुहीं हो। अरे पुरखों के आगे लोग नमन करते थे श्रद्धा से न की डर से । ये बात कब समझ आयेगी तुम्हें ? और खैर जो भी हो किन्तु साफ शब्दों में कह दूँ गर आगामी ५ सालो में स्वयं को न बदले तब हालत वो हो जाएगी की आज तो गार्ड की भी नौकरी मिल जाती है ५ साल बाद वो भी न मिलेगी , और तब मुझे डर है कही नागमणी के बाप की भविष्यवाणी ~ ‘ गोरी कलाईयों की चूडियों खेतों में खनकेगी ‘ सत्य न हो जाए। आगे मर्जी , जो करना है करो मरो । जय जय महाकाल मगध पुत्र (बाबू अंबुज शर्मा के फेसबुक प्रोफाइल से साभार)

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