उत्तरप्रदेश में चुनावी बयार है.हालाँकि नोटबंदी की वजह से मामला अपेक्षाकृत थोड़ा ठंढा है.लेकिन नया साल आते – आते तक माहौल गरमा ही जाएगा. सभी पार्टियां एड़ी-चोटी का जोर लगायेगी ही. चुनावी बिसात में जातियों का गणित तैयार होगा और उसी हिसाब से टिकटों का बंटवारा भी होगा ही. लेकिन बंटवारे में ब्रह्मर्षि समाज की क्या स्थिति होगी? इसपर अखिल भारतीय ब्रह्मर्षि समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संजीव त्यागी (कुतुबपुर वाले)कहते हैं कि बिखराव की वजह से आज ब्रह्मर्षि समाज राजनीति में हाशिए पर चली गयी है.यदि सभी एकजुट होकर किसी भी पार्टी के स्वजातीय को वोट देने का संकल्प कर ले तो उत्तरप्रदेश में राजनीतिक समीकरण और ब्रह्मर्षि समाज की राजनीतिक हैसियत में अंतर आ जाएगा. 
चौधरी संजीव त्यागी

चौधरी संजीव त्यागी अपनी इसी बात को सोशल मीडिया पर विस्तार देते हुए लिखते हैं कि, “ब्रह्मर्षि (ब्राह्मण,भूमिहार त्यागी गालव मोहियाल चितपावन अन्य ) प्रत्याशी के विरोध में खड़े प्रत्याशी को पराजय का मुँह दिखा सकते हैं.अखिल भारतीय ब्रह्मर्षि समाज (त्यागी ब्राह्मण भूमिहार ब्राह्मण गालव मोहियाल, ब्राह्मण वर्ण की 902 उपजातियों) ने राजनीति से दूर रह कर अपनी पहचान खोई है ! उसी का खामियाजा आज़ हमारी युवा पीढ़ी भुगत रही है ! चुनावों में सभी जातियों की वोट संख्या बताई जाती है , सभी जातियों को चुनाव में राजनीतिक दल संख्या बल देख कर टिकिट देते हैं, किन्तु ब्रह्मर्षि समाज को हाशिए पर खड़ा कर दिया जाता है ! उत्तर प्रदेश में चुनावों की घोषणा हो चुकी है ! ब्रह्मर्षि समाज यह ठान ले कि इस बार ब्रह्मर्षि प्रत्याशी को ही अपना वोट दे ! चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल का हो ! यह ना देखें की प्रत्याशी हार या जीत रहा हो ! आपका एक वोट सारे चुनावी समीकरण बदल सकता है ! कुछ ऐसे ब्रह्मर्षि बहुल क्षेत्र है जहाँ हम ब्रह्मर्षि प्रत्याशी के विरोध में खड़े प्रत्याशी को पराजय का मुँह दिखा सकते हैं ! हमारे चंद विजयी प्रत्याशी जो आज़ सारे राजनीतिक दल व मीडिया ने ब्रह्मर्षि समाज को दरकिनार कर रखा है उन्हें हमारे दरवाज़े पर हाथ जोड़कर खड़ा करने पर विवश कर सकते हैं ! समय आ गया ब्रह्मर्षि समाज अपना संख्या बल का प्रदर्शन करें !”

ज़मीन से ज़मीन की बात 

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