अलका लहर में भाजपा ने जीती मुहम्मदाबाद सीट,मउ का हाल तो देखा ही आपने! 
उत्तरप्रदेश में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला. सरकार बन गयी और अलका राय जैसे चुनाव विजेताओं को छोड़ दिया गया. न मंत्रिमंडल में जगह मिली और न कोई ख़ास तवज्जो दी गयी. अलका राय के समर्थकों ने जब सोशल मीडिया पर अलका राय के पक्ष में बात रखी तो कईयों ने तर्क दिया कि अलका राय में क्या खासियत है जो उन्हें मंत्रीमंडल में जगह मिले. मोदी लहर में जैसे बाकी प्रत्याशी जीते, वैसे ही अलका राय भी जीत गयी. लेकिन ऐसी बाते कहने वाले भूल जाते हैं कि इसी मोदी लहर की छाती को रौंदकर ‘मउ’ से मुख्तार अंसारी ने जीत हासिल की और लहर को आइना दिखा दिया. 
ठीक यही हाल मुहम्मदाबाद का भी होता, यदि अलका राय की बजाये किसी और को टिकट दिया जाता. भाजपा इससे भली भांति अवगत थी, इसलिए उसने मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से बसपा के सिगब्तुल्लाह अंसारी के खिलाफ अलका राय को ही टिकट दिया. गौरतलब है कि वे अपने लिए टिकट चाहती भी नहीं थी. उन्होंने अपने भतीजे के लिए टिकट माँगा था, लेकिन भाजपा ने उन्हें ही उतारना उचित समझा. इसकी दो बड़ी वजह थी. पहली वजह ये थी कि वे पहले भी अंसारी बंधुओं को हरा चुकी थी, उस जीत का अनुभव उनके पास था. दूसरी सबसे बड़ी वजह थी, अलका राय के नाम पर भू-समाज की एकता जो इस चुनाव के दौरान स्पष्ट दिखाई पड़ा. किसी और के नाम पर ऐसी एकता संभव नहीं थी. ऐसे में उनकी जीत की संभावना पहले ही प्रबल हो गयी थी. उसपर मोदी लहर ने जीत की संभावना की और अधिक मजबूत किलेबंदी कर दी और हिन्दुत्व से प्रभावित दूसरे समुदाय के लोगों ने भी अलका राय को दिल खोलकर वोट दिया. 
लेकिन भू-समाज की एकता जीत का प्रमुख कारण रहा क्योंकि इस सीट का नाम जरूर मुहम्मदाबाद है, लेकिन ये भूमिहार बाहुल्य सीट है. इन तमाम समीकरणों की वजह से ही मुहम्मदाबाद सीट भाजपा के खाते में गयी और अलका राय तकरीबन 35,000 वोटों से जीती.स्पष्ट है कि अलका लहर में ही मोदी लहर ने काम किया, वरना मउ वाला हाल मुहम्मदाबाद में भी होता.
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