वोडाफोन और आइडिया को विलय के दौरान नियमों का अनुपालन करना है. कोई विशेष व्यवहार नहीं होगा. – मनोज सिन्हा,दूरसंचार मंत्री
जियो के आने के बाद दूरसंचार क्षेत्र की पूरी तस्वीर ही बदल गयी. मजबूरन में इस क्षेत्र में मौजूद कई कंपनियों को अपना वजूद बचाने के लिए नए सिरे से सोंचना पड़ा. इसी कड़ी में वोडाफोन और आइडिया ने आपस में विलय का फैसला लिया. इस विलय के बाद ये देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बन जायेगी. लेकिन सरकार ने आगाह किया है कि इन्हें पूरी तरह से नियमों का पालन करना होगा. इसमें कोई रियायत नहीं मिलेगी.कंपनियों को स्पेक्ट्रम, ग्राहक और आय सीमा के संदर्भ में मौजूदा नियमों का पालन करना होगा.
दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा, ‘उन्हें नियमों का अनुपालन करना है. कोई विशेष व्यवहार नहीं होगा.’ उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में विलय और अधिग्रहण से दूरसंचार क्षेत्र में साठगांठ की आशंका नहीं है.
सिन्हा ने कहा, ‘विलय-अधिग्रहण के बाद प्रत्येक सेवा क्षेत्र में 5-6 कंपनियां होंगी. इसीलिए साठगांठ की कोई संभावना नहीं है. साथ ही आय सीमा, ग्राहक सीमा तथा स्पेक्ट्रम सीमा को लेकर दिशा निर्देश हैं जिससे स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित होगी. हमने इसे लेकर एहतियात बरता है.’
गौरतलब है कि वोडाफोन और आइडिया ने विलय का एलान किया है. विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी में वोडाफोन के पास 45 फीसदी हिस्सेदारी होगी. वहीं, आइडिया के पास 26 फीसदी हिस्सेदारी होगी. वोडाफोन करीब 4.9 फीसदी हिस्सेदारी आइडिया प्रमोटर्स को ट्रांसफर करेगी. आगे चलकर नई कंपनी में दोनों की हिस्सेदारी बराबर हो जाएगी. विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी टेलीकॉम सेक्टर में देश की सबसे बड़ी कंपनी होगी, जिसके करीब 38 करोड़ ग्राहक होंगे.


