लॉकडाउन की वजह से देश में विचित्र स्थिति है जो जहाँ है वो वही फंसा है. अब चुकी यह लॉकडाउन लम्बा और लंबा खींचता जा रहा है तो अपने घर से दूर रहे लोगों में बेचैनी होना स्वाभाविक ही है. फिर सवाल हर दिन की जरुरत पूरा भी करना है और आगे के लिए भी सोंचना है. यही सोंचकर यूपी समेत कई दूसरे राज्यों ने अपने यहाँ के मजदूरों और छात्रों को विशेष बसों का इंतजाम करके पूरे एहतियात से बुला लिया. लेकिन बिहार सरकार का रवैया बेहद ढीला – ढाला है. उन्हें न अपने यहाँ के मजदूरों की चिंता है और न छात्रों. यही वजह है कि कोटा में रह रहे बिहारी छात्र नीतीश सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए हैं.
बिहार सरकार की तरफ से कोई मदद मिलता न देख ढेरों छात्रों ने भूमंत्र फाउंडेशन से भी मदद मांगी है जिसके बाद भूमंत्र से जुड़े तमाम लोग छात्रों की मदद के लिए आगे आए हैं और हर संभावित रास्ते की तलाश की जा रही है.
भूमंत्र की तरफ हेल्पलाइन नंबर जारी करते हुए लिखा गया –
कोटा में फंसे बच्चों के लिये पटना हाई कोर्ट में PIL फ़ाइल किया गया है. सुनवाई की तारीख 5 मई है। केस की मजबूती के लिये गार्जियन से अनुरोध है कि अपने सम्बंधित जिले के अधिकारी के पास बच्चे को लाने के लिये पास अप्लाई करें, पास रिजेक्ट होने पर उस रिजेक्शन की कॉपी हमे भेजें जिसको की हमलोग PIL में attach(intervention application) करेंगे जिससे की हमलोगों का आधार मजबूत होगा। और अधिक जानकारी के लिये आप भूमंत्र हेल्प लाइन से संपर्क कर सकते हैं। हेल्प लाइन नंबर है 8800543189
भूमंत्र के उर्जावान सदस्य आलोक कुमार जानकारी देते हुए भूमंत्र पर लिखते हैं –
“कोटा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी..#कोटा मे फँसे बच्चों के लिए पटना हाईकोर्ट मे पीआईएल डाला जा चुका है.. जिसकी अगली सुनवाई की तारीख 5 मई तय की गयी है.. कोटा में फँसें बच्चों के अभिवावकों से निवेदन है की वो अपने अपने जिलों मे बच्चों को लाने के लिए पास के लिए आवेदन करें और आवेदन रिजेक्ट होने पर उन सभी आवेदनों को हमारे पास भेजें..सभी जिलों के रिजेक्ट आवेदन को हाईकोर्ट के पीआईएल के साथ संलग्न कर दिया जायेगा. और इससे केस मे मजबूती आयेगी.. इसलिए अभिवावकों से निवेदन है इसको गंभीरता से लें और अगर कोई बात समझ मे ना आये तो कमेंट बॉक्स मे अपने सवाल रखें और अपना नंबर भी दें ताकि हमलोग आपकी सहायता कर पाएं.. धन्यवाद .”
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भूमंत्र के सदस्य संजीव ठाकुर लॉकडाउन में फंसे छात्रों के दर्द को शब्दों में पिरोकर कहते हैं –
ये तस्वीरे शिक्षा नगरी कोटा की है। जहा हमारे देश के भावी भविष्य अनसन पर है। क्यो?? क्योकि ये बच्चे बिहारी है,अरे नही क्योकि ये बच्चे उस राज्य से आते है जहाँ हर घर मे एक नेता है,जो सिर्फ चाटने का काम करता है कभी जाती के नाम पर कभी धर्म के नाम पर।मैने इस मंच पर ये मुद्दा इसलिए उठाया क्योकि हम भूमिहारों की एक खासियत होती है….हम पर सब कुछ हावी होता है पर इंसिनीयत सबसे ऊपर होती है।
जरा गौर से देखिए इन बच्चो को, कितने बेबस लाचार और दबाब में है ,कसूर सिर्फ इतना है की ये उस राज्य से जहाँ की सरकार निकम्मी है,जो सिर्फ मूक रहती है उसका मुह ना किसान वर्ग पर खुलता है ना मजदुर वर्ग पर…..पर ये तो बच्चे है साहब इन पर तो तरस खाइये। जहाँ अन्य राज्य सरकारें अपनी अपनी साधनों द्वार अपने बच्चो को वापस ला चुकी है।हमारी सरकार अभी विचार में है कि इन्हें लाया जाए कि नही।क्यो?
क्या माननीय मुख्यमंत्री के पास इन मासूम बच्चो को वापस लाने के लिये पैसे(fund)की कमी तो नही…हो भी सकता है या उन्हें ये ज्यादा महत्वपूर्ण नही लगता होगा। एक बार के लिए इन बच्चो की मनोदशा पर गौर कीजिये …अपनी सरकार के प्रति इनकी खिन्न भावना को देखिए इन तस्वीरों में…और सबसे ज्यादा लाचार होंगे इनके अभिवावक जिनके जिगर के टुकड़े इनसे कोसे दूर दर्द में है ।खैर ओ भी क्या कर सकते है वो भी तो इस निक्कमी सरकार के हाथों मजबूर है…और हाँ वो सत्ता पक्ष के विधयाक या संसद भी तो नही है। खैर..छोड़िये क्या फर्क पड़ता है हम को क्या हम तो मस्त खा रहे है सो रहे है। हमारे बच्चे थोड़े है.।तो माननीय ये बात दर्शाती है कि इतने महत्वपूर्ण और जरूरी मुद्दे पर ये सरकार कुछ नही कर रही तो आग एक दिन हमारे ओर आपके घरो में भी लग सकती है….तो ये जरूरी है कि इस मुद्दे पर हर कोने से आवाज उठे…इतनी आवाज उठे की उस बहरी सरकार की कानो तक पहुँचे और उसे दिखे की जिन लोगे ने उसे बनाया है ..उनकी सहायता करें, उसका जमीर जागें.. की सिर्फ वोट मांगने के लिए मुह नही खुलता और भी मुद्दे हैं ..
आखिर में मैं इतना कहूंगा की मैं कोई राजनीति नही कर रहा हूँ।मै एक आम छात्र हु जो गलत को गलत ओर सही को सही बोलता है..क्या आपको ये गलत नही लग रहा ।ये अपरिपक्व बच्चे खुद को कैसे संभाल रहे होंगे,इनके दूसरे राज्यो की मित्र जो अपने घर जा रहे होंगे तो इनके मन पर क्या असर हो रहा होगा।




