गाजीपुर के विकास की कथा और मनोज सिन्हा का योगदान
सन 1962 में ग़ाज़ीपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर विश्वनाथ सिंह गहमरी संसद पहुँचे। वहां पहुंचकर उन्होंने ग़ाज़ीपुर सहित पूरे पूर्वांचल का हाल सदन को रोकर सुनाया। उनके एक घंटे के भाषण को पूरा सदन बहुत ख़ामोशी से सुनता रहा और भाषण के अंत में ग़ाज़ीपुर की दुर्दशा को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू समेत कई सांसदों की आँखों में आँसू आ गये। विश्वनाथ सिंह गहमरी ने सदन में बताया कि ग़ाज़ीपुर में इतनी ज़्यादा ग़रीबी और भूूूूखमरी है कि वहाँ के लोग जानवरों के गोबर को पानी में छानकर अनाज निकालते हैं और फिर उसी अनाज की रोटी बनाकर खाते हैं। यह हाल सिर्फ़ ग़ाज़ीपुर जिले का ही नहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों का है। विश्वनाथ सिंह के मार्मिक भाषण को सुनकर पंडित नेहरू ने आनन-फानन में वित्त सचिव एफ एम पटेल की अध्यक्षता में पटेल आयोग का गठन किया और पूर्वांचल के विकास के लिए रिपोर्ट माँगी। लेकिन पूर्वांचल का दुर्भाग्य कि पटेल आयोग की रिपोर्ट पर उस वक़्त अमल नहीं किया जा सका। विश्वनाथ सिंह गहमरी भी दोबारा चुनाव हार गये और इस रिपोर्ट पर ऐसी बर्फ़ जमी जो कभी पिघल न सकी।
मनोज सिन्हा ने गाजीपुर की काया पलट दी
इस पूरे वाक़िए को सुनाने का मक़सद इतना ही था कि आप समझ सकें कि ग़ाज़ीपुर जिला विकास के मामले में कहाँ खड़ा था। ग़ाज़ीपुर का नाम प्रदेश के सबसे पिछड़े जिले में तो लिया ही जाता था इसकी गिनती देश स्तर पर भी पिछड़े जिलों में होती थी। यहाँ के लोग बलिदान देने में तो अग्रणी पंक्ति में खड़े रहते हैं लेकिन यहाँ के लोगों को अपना हक़ माँगना नहीं आता इसलिए यह जिला वक़्त के साथ लगातार पिछड़ता चला गया लेकिन पाँच साल पहले जब ग़ाज़ीपुर से चुनाव जीतकर मनोज सिन्हा संसद पहुँचे और मोदी के मंत्रीमंडल में उन्हें जगह मिली तो ग़ाज़ीपुर सहित पूरे पूर्वांचल के विकास के दरवाजे तेजी से खुले और बड़ी ख़ामोशी से उन्होंने पाँच साल में पूरे पूर्वांचल की काया पलट कर रख दी।
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अपने कार्यकाल के पूर्वार्द्ध में ही मनोज सिन्हा ने पटेल आयोग की रिपोर्ट की अहम परियोजना ताड़ीघाट-मऊ रेलवे लाइन का कार्य शुरू कराया और कार्यकाल के आख़िरी दिनों में वो ग़ाज़ीपुर को एयरपोर्ट का तोहफ़ा दे गये। इसके अलावा ग़ाज़ीपुर सिटी रेलवे स्टेशन से पूरे देश भर के लिए उन्होंने दर्ज़नों ट्रेन चलाई और जिले की खस्ताहाल सड़कों को दुरूस्त कराने सहित मूलभूत सुविधाओं को जन-जन तक पहुँचाने का काम प्राथमिकता से किया। जिस ग़ाज़ीपुर रेलवे स्टेशन पर रात में टिम-टिम करके एक लालटेन जला करती थी अव वो रेलवे स्टेशन दूर से ही दूधिया रौशनी में नहाया दिखता है इसके अलावा जिले के विकास के लिए ढेरों योजनाएं स्वीकृत हो गयी हैं उनमें से ज़्यादातर योजनाओं का शिलान्यास हो चुका है या होने वाला है।
विकास के मुख्यधारा में गाजीपुर
जिस ग़ाज़ीपुर जिले की गिनती सूबे के सबसे पिछड़े जिले में होती थी मनोज सिन्हा ने अपनी मेहनत और लगन से उस जिले को विकास की मुख्यधारा में लाकर खड़ा कर दिया। आज़ादी के बाद हुए सारे कामों को जोड़ दिया जाय तो भी मनोज सिन्हा ने सिर्फ़ पाँच साल में ही जिले के लिए उससे कहीं ज़्यादा काम किया है। उन्होंने ग़ाज़ीपुर के लिए इतना किया है जिसे एक साथ बताना या लिखना बहुत मुश्किल है और इस बात को उनके विपक्षी भी स्वीकार करते हैं। कम बोलने वाले, ज़मीन से जुड़े नेता और ईमानदार तथा कर्मठ व्यक्तित्व के मालिक मनोज सिन्हा को आप कभी ज़मीन पर लोगों के साथ बैठकर खाना खाते हुए, कभी बच्चों के साथ बच्चा बनकर खेलते हुए तो कभी कड़ी धूप में जनता की समस्याएं सुनते हुए देख सकते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें देश के सबसे ईमानदार नेताओं में से एक कहा था और उसका सबूत यही है कि रेलवे और दूरसंचार जैसे मंत्रालय संभालते हुए भी उनके दामन पर भ्रष्टाचार का एक भी धब्बा आज तक नहीं लगा।

ग़ाज़ीपुर में क्रांतिकारियों, देशभक्तों की कोई कमी नहीं सियासत करने वाले बड़े-बड़े लोग भी ग़ाज़ीपुर में मौज़ूद हैं लेकिन विकास करने के लिए मनोज सिन्हा के अलावा और कोई नहीं है। अरसे बाद जिले को मनोज सिन्हा जैसे ईमानदार छवि वाला और राष्ट्रीय स्तर का नेता मिला है जो ग़ाज़ीपुर को बुलंदियों तक ले जा सकता है। पहले बाहर के लोगों से बताने में यहाँ के निवासियों को झिझक होती थी कि मैं ग़ाज़ीपुर का रहने वाला हूँ लेकिन सिन्हा जी की बदौलत यहाँ के लोग अब शान से कहते हैं कि मैं ग़ाज़ीपुर का रहने वाला हूँ। अब वक़्त आ गया है कि ग़ाज़ीपुर की जनता विकास पुरूष मनोज सिन्हा के नाम पर मुहर लगाकर, उन्हें एक बार फिर से लोकसभा भेजकर जिले के विकास का मार्ग प्रशस्त करके उनकी मेहनत को अंजाम तक पहुँचाने का काम करे और आने वाले समय में एक नये ग़ाज़ीपुर से अपना साक्षात्कार करे।
ग़ाज़ीपुर का मुस्तक़बिल आपके हाथों में है एक विकसित, शिक्षित और मजबूत ग़ाज़ीपुर चाहिए या बदहाली, तंगहाली, तुष्टिकरण, जातिवाद और अपराधियों के चक्रव्यूह में कराहता ग़ाज़ीपुर चाहिए। ये आप के ऊपर निर्भर करता है कि आप ग़ाज़ीपुर की गिनती सूबे के सबसे विकसित जिलों में करना चाहते हैं या जिले को सिर्फ़ अफ़ीम और अपराधियों के इर्द-गिर्द घूमते देखना चाहते हैं। दो महीने बाद होने वाले आम चुनाव में मतदान करने से पहले एक बार ज़रूर सोचिएगा कि आप जिले को किसके हाथों में देना चाहते हैं और जिले को कहाँ पहुँचाने चाहते हैं। आपके एक वोट से ग़ाज़ीपुर के स्वर्णिम विकास के दरवाजे हमेशा के लिए खुल सकते हैं इसलिए अपने लिए और अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए भी अपने क़ीमती वोट का इस्तेमाल सही जगह पर ही कीजिएगा।
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