ब्रम्हर्षि चिंतक व विचारक “राजीव कुमार ” की समाजसेवी सह सोशल मीडिया एक्टिविस्ट स्वo राजीव नयन सिंह को बतौर श्रधांजलि समर्पित एवं समस्त सवर्ण समाज को संबोधित प्रस्तुति
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इस नश्वर संसार में जो भी आया है उसे एक न एक दिन जाना ही होगा । यह एक ध्रुव सत्य है ।
परंतु उनके जाने के पश्चात् उनके कृत्य एवं विचारों को सदैव याद किया जाता है ।
ऐसे ही एक सच्चे समाजवादी एवं सामाजिक न्याय के पुरजोर समर्थक थे भूमिपुत्र स्वo राजीव नयन सिंह जिन्होंने 07-03-2019 को इस संसार को अलविदा कह दिया ।
स्वo राजीव नयन सिंह सवर्ण समाज के साथ हो रहे अन्याय के मुखर विरोधी थे ।
जातिगत आरक्षण से प्रतिभा को हो रहे नुकसान का उन्होंने जमकर विरोध किया ।
बात 2016 की है जब भूमंत्र नामक भूमिहार ब्राम्हणों का एक वैचारिक मंच अवतरित हुआ ।
इसी मंच के माध्यम से मुझे समान सोंच वाले बहुत सारे सामाजिक न्याय के सिपाहियों से रू ब रू होने का अवसर मिला जिनमें सभी के सभी कालान्तर में अलग अलग संगठनों के बैनर तले देश में फैली जातिगत आरक्षण जैसी प्रतिभा की हत्यारण सामाजिक कुरीति को मिटाने हेतु अपने अपने स्तर से मुखर एवं सक्रीय हैं ।
इन्हीं सब जातिगत आरक्षण विरोधी सामाजिक न्याय के सच्चे प्रहरियों में से एक थे स्वo राजीव नयन सिंह ।
भूमंत्र नामक सोशल मीडिया मंच के माध्यम से जातिगत आरक्षण के खिलाफ विचारों के आदान प्रदान ने थोड़े ही दिनों में हमें एक दुसरे के इतना करीब ला दिया था कि स्वo राजीव नयन सिंह मुझसे फोन पर हमेशा बात करते थे खास कर जब भी जातिगत आरक्षण या किसी और राजनैतिक अथवा सामाजिक कुरीति पर मैं कोई लेख लिखता अथवा अपना विचार व्यक्त करता था ।
उनके मन के अंदर इन कुरीतियों के खिलाफ भी वही ज्वाला धधक रही थी जो मुझ जैसे अन्य सामाजिक न्याय के सारथीयों के मन में धधक रही है और जो न्याय एवं प्रतिभा के सच्चे पुजारी हैं ।
भूमंत्र पर कई बार मेरे द्वारा व्यक्त किए गए विचारों पर प्रतिक्रियास्वरूप जब किसी भी सदस्य ने मुझपर अभद्र अथवा उग्र टिपण्णी की तो स्वo राजीव नयन सिंह ने मेरे बचाव में उस सदस्य से बहुत बार वाद विवाद किया ।
कल जब मैंने यह खबर सुनी कि स्वo राजीव नयन सिंह इस दुनिया में नहीं रहे तो मुझ जैसे लेखक के मन के भीतर जैसे आँसूओं का सैलाब उमड़ पड़ा और मैं द्रवीभूत हो उठा ।
मेरा मन उनके उन कृत्यों को याद कर इसलिए रो पड़ा कि जब भूमंत्र पर देश में व्याप्त राजनैतिक एवं सामाजिक कुरीतियों पर मैं प्रहार करता था तो बहुत सारे सदस्य मुझे अभद्र बातें कहते थे तथा मेरी id तक को फेक कहते थे और तब मेरे बचाव में बहुतों बार स्वo राजीव नयन सिंह आते थे ।
मुझे इस बात का आजीवन दुःख रहेगा कि मैं उनसे सदेह मुलाकात नहीं कर पाया परंतु फोन से हमेशा बात चित होती रहती थी और उस मृदुभाषी एवं निश्छल व्यक्ति को मैं काफी पसंद भी करता था ।
दुःख की इस घड़ी में मेरी सहानुभूति उनके परिवार के साथ है एवं ईश्वर से यही प्रार्थना है कि उनके परिवार को शक्ति दें ।
चलते चलते भूमिपुत्र स्वo राजीव नयन सिंह को बतौर श्रधांजलि यही कहना चाहूँगा :
” रो रहा है दिल तुझे याद करके , हम रो रहे हैं तुम्हें याद करके ” ।
स्वo राजीव नयन सिंह अमर रहें ।





मैं व्यक्तिगत रूप से स्व श्री राजीव जी को नही जानता था लेकिन सोसल मीडिया(फेसबुक) के द्वारा मैं उनसे जूड़ा। जब मैं उनसे जूड़ा तो मैंने देखा कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद भी अपने अंतिम समय तक वो बहुत ही जीवंत और सबसे जूड़े रहें और तो और स्वर्णो की अधिकार पर अपने विचार को लिखते रहें। जिस बीमारी से अच्छे से अच्छे लोग टूट जाते हैं वहीं श्री राजीव जी न ही सिर्फ कैंसर से बेखौफ लड़ते रहें बल्कि युवाओं में स्वर्ण आंदोलन को लेकर जोश भी भरते रहें।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को इस मुश्किल घड़ी में हिम्मत दे।
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