भू-मंत्र पर कल हमने एक पोस्ट “माईलॉर्ड यकीन नहीं होता कि 15 गीदड़ों ने 34 शेरों का शिकार किया” शीर्षक से डाला था. इसके जरिए हमने सेनारी नरसंहार मामले में कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया था. सवाल ये था कि न्यायालय ने सिर्फ 15 लोगों को ही सिर्फ हत्यारा माना, बाकी 23 को आरोप मुक्त कर दिया गया. लेकिन सवाल है कि ये 15 लोग अपने से तगड़े 34 प्रतिद्वंदियों को उनके गाँव में घुसकर कैसे मार सकते हैं?
अब यही सवाल सेनारी गाँव के भुक्तभोगियों की जुबान पर भी है. नेटवर्क 18 ग्रुप के चैनल ईटीवी ने जब सेनारी गाँव के नरसंहार पीड़ित परिवार के मुकेश कुमार से बात की तो उन्होंने न्यायालय के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस फैसले से गांव के लोगों के साथ न्याय नहीं हुआ है. यह कैसे संभव है कि 15 लोगों ने मिलकर 34 लोगों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी है. सेनारी गांव की आबादी 200 है.
उस घटना को याद करते हुए मुकेश कुमार कहते हैं कि उनके छोटे भाई नीरज कुमार और चाचा वीरेंद्र कुमार की निर्मम तरीके से गला काटकर हत्या कर दी गई थी. इस वारदात को अंजाम देने में आस पास गांवोें के साथ बाहर के काफी संख्या में लोग शामिल थे. उनका कहना है कि उनके पक्ष को कोर्ट में सही ढंग से नहीं रखा गया.
मुकेश कुमार के अनुसार उनके भाई और चाचा घर से बाहर बैठे हुए थे तभी पुलिस की वर्दी में कुछ लोग आएं और कहा कि रणवीर सेना के कुछ लोग पकड़े गए हैं. आप लोग चलकर उन्हें केवल पहचान कर लीजिए. फिर दोनों को गांव के बाहर मंदिर पर ले गए और निर्मम तरीके से हत्या कर दी. इसी तरह गांव से बुला-बुलाकर 34 लोगों की मंदिर के सामने हत्या कर दी गई थी.
सेनारी गांव के मनीष कुमार के परिवार के पांच लोग अमरेश शर्मा, विमलेश शर्मा, अवधेश शर्मा, राजू शर्मा और सजतानंद शर्मा की हत्या कर दी गई थी. उनका कहना है कि नरसंहार केस में 23 लोगोें को बरी करना ठीक नहीं है. उन्होंने दोषियोें को फांसी की सजा देने की मांग की.



