सामाजिक तनाव को बढ़ावा देती फिल्म ‘चौहर’, फिल्म में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल, कहाँ सोया है सेंसरबोर्ड?
फिल्म का उद्देश्य मनोरंजन और पैसा कमाना जरूर होता है लेकिन उसके लिए सामाजिक विद्वेष फ़ैलाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती. फिर भी फिल्म को हिट कराने के मकसद से निर्माता-निर्देशक सतही स्तर पर जाने से नहीं चूकते. 7 अप्रेल को रिलीज होने वाली हिंदी फीचर फिल्म ‘चौहर’ ऐसी ही फिल्म है.
सस्ती लोकप्रियता और जबरन विवाद पैदा करने की नीयत से इसमें बाभन यानी भूमिहार ब्राहमण समाज को निशाना बनाने की कोशिश की गयी है. ये जातिसूचक शब्द सामाजिक समरसता के लिए घातक है. आश्चर्य इस बात है कि इस मामले में सेंसरबोर्ड ने अपनी कैंची क्यों चलायी?
बहरहाल भूमिहार ब्राहमण समाज में फिल्म को लेकर रोष है. इसी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर @BM प्रोफाइल से लिखा गया –
‘चौहर’ को ऐसे दिखाएँ बाभन अपना ‘जौहर’
“फिल्म ‘चौहर’ में ‘बाभन’ शब्द का जिस तरह से इस्तेमाल किया गया है उसके लिए किसी धरना-प्रदर्शन और विरोध की जरुरत नहीं. व्यर्थ की पब्लिसिटी नहीं देनी है. सबसे बेहतर उपाय है, इसकी इकोनोमी और निर्माता के मनोबल पर चोट करना. फिल्म 7 अप्रेल को रिलीज होने वाली है. यदि फिल्म को कोर्ट में खींचा जाए और समाज के दस वकील पहल करे तो इनकी नानी याद आ जायेगी. बेगूसराय से लेकर दिल्ली – मुंबई तक इतने केस कर दो कि फिल्म भूलकर इन्हें सिर्फ तारीख याद रह जाए. फिल्म रिलीज समय पर नहीं होगी तो ऐसे ही ये आधे बर्बाद हो जायेंगे. आपकी इस बारे में क्या राय है? “
SYNOPSIS : With Amit Kashyup and Richa Dixit in prominent roles, the movie was released in 2017. This romantic drama is directed by Raghubeer Singh.





