लेकिन लालू जी बेकारे चिंता कर रहे थे.कुछो नहीं हुआ. आ नीतिश बाबू तो मुख्यमंत्री आवास में कमरा बंद कर एतना मुसकाये कि आईना भी टूट कर दिलरुबा वाला गाना गाने लगा. काहे कि रब्बो(राबड़ी) भौजाई की बतवा याद करके और आईना के सामने नीतिश बाबू खूब इतराए और गाना भी गुनगुनाये – “अभी तो मैं ज़वान हूँ …. हूँ हूँ …. साला मजा आ गया. जियो!बिहार में बहार है,फिर से नीतिशे कुमार है.खाली ई बार ‘साला’ बदल गया है.काहे कि भौजाई ने एबकी बार औपोजिशन लीडर को हमरा साला बनने का प्रपोजल दे मारा. हो हो हो … बहुते मज्जा आ रहा है.
लेकिन इस मजाक से देवर जी तो मुसकुरा कर चल दिए.आपके प्रतिवाद में एक बात नहीं कही. ऐसे भौजाई राबड़ी और देवर नीतिश की हंसी ठिठोली पुरानी है. एक बार पहले भी नीतिश कुमार को लेकर वे ऐसा बयान दे चुकी हैं तब जदयू के नेता लल्लन सिंह को उन्होंने नीतिश का साला बनाया था और इस बार उससे भी बड़का घर ढूंढा है.फिर नीतिश क्यों न मुसकाये? वो फूलगेंदवा फेंकती हैं और आप मुस्कुराकर चल देते हैं. लेकिन एक्को बार देवरानी के बारे में नहीं सोंचे कि नीतिश जी फिर घोड़ी पर चढेंगे तो क्या होगा? बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री होते हुए भी औरतों को लेकर इतनी डाह. वैसे राबड़ी देवी आइडिया अच्छा है. लेकिन दूसरे की बेटी-बहिन और बीवी से ब्याह कराने की बजाए भौजाई अपने कुल में ही क्यों नहीं सुयोग्य वधु खोजती हैं.गठबंधन स्थायी हो जाएगा और नीतिश बाबू भाजपा में फिर से बसने की हूल भी नहीं दे पायेंगे.क्यों ठीक कहा न भौजाई!आपके घर में भी विवाह योग्य वधुएँ है ही.दूसरों की बहन की क्यों चिंता करती हैं? सीरियसली नै लीजियेगा, हमहू मजाके कर रिये हैं. ही ही ही . बिहार में बहारे – बहारे है, काहे कि देवर-भौजाई की सरकार है.



