मुंगेर । बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री एवं मुंगेर जिला परिषद के पहले अध्यक्ष बिहार केशरी डॉ श्रीकृष्ण सिंह की 129 वीं जयंती पर मुंगेर वासियों ने उन्हें याद किया। इस मौके पर सुबह दस बजे श्रीकृष्ण सेवा सदन पुस्तकालय के सामने स्थित श्रीकृष्ण वाटिका में जिलाधिकारी उदय कुमार सिंह एसपी आशीष भारती, डीडीसी रामेश्वर पांडेय, नगर आयुक्त डॉ श्यामल किशोर पाठक, जिप अध्यक्ष ¨पकी कुमारी, डीईओ केके शर्मा, न्यास पर्षद के सचिव प्रभात कुमार सहित शहर के सैकड़ों लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। बताते चलें कि डॉ श्रीकृष्ण ¨सह मुंगेर जिला परिषद के भी पहले अध्यक्ष थे। वहीं वे अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में भी मुंगेर जिला के खड़गपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। मुंगेर से उनका अत्यधिक लगाव था। अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में भी जब वे मुंगेर आते थे तो वे श्रीकृष्ण सेवा सदन पुस्तकालय में ही रहा करते थे। उन्होंने श्रीकृष्ण सेवा सदन को अपनी लगभग बीस हजार से अधिक किताबें दान में दी थी। वर्तमान समय में भी उनके जीवन से संबंधित कई महत्वपूर्ण वस्तुएं सेवा सदन पुस्तकालय के कमरे में धरोहर के रूप में संरक्षित की गई है। अभी भी इन वस्तुओं का यहां आकर अवलोकन किया जा सकता है। इस मौके पर प्रो विद्या चौधरी, प्रो शब्बीर हसन, बमशंकर प्रसाद ¨सह, नवलकिशोर प्रसाद ¨सह, निक्कू सिंह , प्रो सुधीर कुमार, राजकुमार सरावगी, राजीव रंजन सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

कांग्रेसियों ने मनाई बिहार केशरी की जयंती 
मुंगेर : तिलक मैदान स्थित जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में शुक्रवार को जिलाध्यक्ष सौरभ निधि की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सूबे के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण ¨सह की जयंती मनाई। इस मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने श्रीकृष्ण ¨सह के चित्र पर माल्यार्पण किया। इसके बाद उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सौरभ निधि ने कहा कि डॉ. श्रीकृष्ण ¨सह कॉलेज की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने व्यवहार न्यायालय में वकालत आरंभ किया। वे जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के बाद 1934 में जिला परिषद के पहले अध्यक्ष निर्वाचित किए गए। इसी समय वे बापू के साथ स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ कर काम किया। इसके बाद देश के स्वतंत्र होने के बाद प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने तथा जीवनपर्यंत मुख्यमंत्री रहे। उनके जीवन काल में बिहार ने विकास के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किया। उस समय बिहार देश के सभी राज्यों से विकास के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा था। उनके बाद जैसे बिहार में विकास की गति थम सी गई। वे सामाजिक न्याय के पुरोधा तथा राष्ट्रवाद की प्रतिमूर्ति थे। उनके काल में बिहार में जमींदारी प्रथा समाप्त हुई। तत्कालीन व्यवस्था का पुरजोर विरोध झेलकर भी उन्होंने जमींदारी प्रथा को समाप्त किया। बिहार केशरी आधुनिक बिहार के शिल्पकार थे। उनके काल में बिहार ने औद्योगिक, कृषि, व्यवसाय आदि क्षेत्र में तेज गति से विकास किया। मौके पर कृष्णा पासवान, मो नरूल्लाह, रणजीत ¨सह, अजीत मालाकार, बीके निराला, चंदन कुमार, प्रवीण कुमार, निक्कू आनंद, पंकज यादव, मो कमाल, प्रेमा वर्मा, आरती दत्ता, रमाशंकर ¨सह आदि उपस्थित थे। (दैनिक जागरण से साभार)