भू-समाज को लंबे समय से एक ऐसे राष्ट्रीय नेता की तलाश थी जिसके पीछे पूरा समाज लामबंद हो सके. लेकिन ऐसा कोई भी सर्वमान्य नेता अबतक नहीं मिल पा रहा था. पर अब लगता है कि लंबे अंतराल के बाद मनोज सिन्हा के रूप में भू-समाज को उसका अपना नेता मिलने वाला है.
वर्तमान में वे लोकप्रियता के शिखर पर हैं और उनके आस-पास भी कोई दूसरा भू-नेता नज़र नहीं आता. वैसे समाज में नेता तो बहुत हैं लेकिन उन सबकी सीमाएं है. राष्ट्रीय स्तर का पढ़ा-लिखा और साफ़-सुथरी छवि का ऐसा कोई भी नेता नहीं है जो मनोज सिन्हा के समकक्ष आज की तारीख में खड़ा हो सके.
दरअसल भू-समाज को लंबे समय से ऐसे ही नेता की तलाश थी जो राजनीति में हाशिये पर जा रहे भू-समाज को नयी दिशा प्रदान कर सके और भू-समाज उसपर गर्वान्वित भी हो सके.मनोज सिन्हा में ये सारी खूबियाँ हैं.
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