-रौशन कुमार सिंह-
शाह- बादशाह और राजनाथ के खेल में हाशिए पर भूमिहार, सशक्त भूमिहार नेता की जरूरत
आज देश में भाजपा का चरमोत्कर्ष है जिसमें शाह और बादशाह के साथ राजनाथ का संगम है।। क्या आपने महसूस किया है .आज देश के सारे राजपूत राजनाथ के साथ हैं।। यह समझिए कि बगैर किसी हल्ला और प्रयास के राजपूत राजनाथ के साथ हो लिए. अब राजनाथ राजपूतों के पावर हाऊस बन गए हैं और उन्होंने दूसरे दलों से चुन चुनकर राजपूतों को भाजपा में ऊँचे पदों पर बैठाया और टिकट दिलवाया।।कृषि मंत्री राधामोहन सिंह इस बात के जीवंत उदाहरण हैं.
सत्ता की खुशबू राजपूत जल्दी सूंघ लेते है. आपको याद होगा कि लालू राज में सत्ता का स्वाद चाटने के लिए अधिकांश राजपूत लालू यादव के साथ हो गये थे।। यादव के बाद राजपूत विधायकों की संख्या ही सबसे अधिक राजद में होती थी।। ऐसा ही कुछ तस्वीर यूपी में मुलायम सरकार में भी थी।। कांग्रेस में भी राजपूतों का पावर हाउस दिग्गी//सिंधिया…..के रुप में पर्याप्त है जो राजपूतों को पद व पावर दिलाने में सक्षम हैं।। पर भूमिहार कहां है? किसी भी दल में कहीं नहीं।। पर बकलोली करने व काबिलपंथी दिखाने में सबसे आगे हैं व चौक-चौराहों पर खाली पेट हल्ला करने में आगे हैं।। लोकसभा चुनाव का यहाँ उल्लेख करना चाहूँगा. उत्तर बिहार की मोतीहारी/महाराजगंज/मुजफ्फरपुरर/वैशाली सभी चारों लोकसभा सीट भाजपा ने राजपूतों को व अन्य एक पिछडा को दे दिया।। हमें क्या मिला? बाबाजी का ठुल्लू।। हाल ऐसा है कि कांग्रेस में भी कि अखिलेश सिंह को अपनी सीट नहीं मिली और रामजतन सिंहाजी का टिकट कट गया।।
भाजपा में भूमिहार के मुकाबले यादव ज्यादा टिकट ले गये जहां से भाजपा को वोट नहीं मिला।।सीपी ठाकुर के एक बेटा को सीट मिली वो भी बेमन वाली. मिला-जुलाकर भाजपा ने भी भूमिहारों को दिया बाबाजी का ठुल्लू. फिर भी भूमिहार भाजपा पर मर मिटने को तैयार हैं. लेकिन ये नहीं सोंचते कि बाकी दलों की तरह भाजपा भी उन्हें उसी तरह से ट्रीट कर रही है और ये सब मज़बूत नेतृत्व के अभाव में हो रहा है. इसलिए दरकार है एक सशक्त भूमिहार नेता की.
(रौशन कुमार सिंह द्वारा की गयी फेसबुक कमेंट को सिलसिलेवार ढंग से जोड़कर इसे लेख का रूप दिया गया है.)





hum khush hai phir bhi
Well said and with facts.If anyone still prefers to keep his shut , then it's shocking. For why, we can't understand it. Poor fellow.
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