पांच राज्यों में चुनाव का बिगुल बज चुका है.दिन नजदीक आ रहे हैं, सो प्रचार कार्य भी जोर-शोर से चल रहा है. सभी पार्टियों ने अपने-अपने स्टार प्रचारकों की सूची पहले ही जारी कर दी है.उत्तरपदेश चुनाव के संदर्भ में देश की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने भी प्रचारकों की अपनी सूची जारी की जिसमें टॉप पर अपेक्षा के अनुरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,अमित शाह और राजनाथ सिंह हैं.लेकिन चौकाने वाली बात रही कि इसमें कई बड़े नाम जैसे आडवाणी,जोशी, वरुण गांधी आदि गायब रहे. 
ख़ैर इनके गायब होने की बात तो समझ में आती है लेकिन कुछ ऐसे नाम भी सूची से गायब कर दिए गए जो दिलो-जान से भाजपा के साथ खड़े रहते हैं और यूपी चुनाव में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं.लेकिन इन्हें मौका ही नहीं दिया गया और इनकी जगह इनसे कम उपयोगी नेताओं को जगह दी गयी.इस सिलसिले में दो नाम प्रमुख हैं.ये दोनों नेता भू-समाज से ताल्लुक रखते हैं.एक यूपी से हैं तो दूसरे बिहार से. 
पहले नेता हैं रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा और दूसरे नेता हैं लघु और सूक्ष्म उद्योग राज्यमंत्री गिरिराज सिंह .ये दोनों यूपी चुनाव में मोहम्मदाबाद जैसे भूमिहार बहुल इलाके समेत पूरे पूर्वांचल में प्रभावी चुनाव प्रचार कर सकते थे. लेकिन दोनों को ही यूपी चुनाव प्रचार में जगह नहीं दी गयी. 
दूसरी तरफ रामविलास पासवान और मुख्तार अब्बास नकवी को जगह दी गयी है.ये वही रामविलास पासवान हैं जो बिहार विधानसभा चुनाव में अपने क्षेत्र में इतना प्रचार नहीं कर पाए कि भाजपा गठबंधन को कुछ सीटों की बढ़त हासिल हो सके.ये अपने प्रचार के लिए तो पीएम मोदी पर आश्रित रहते हैं. मोदी लहर में ही इनकी मरणासन्न पार्टी का जीर्णोद्धार हुआ और अब ये भाजपा को यूपी में जीत दिलाएंगे? बुद्धि की बलिहारी है. 
दूसरी तरफ जब भाजपा ने जब एक भी मुस्लिम को पूरे यूपी में टिकट नहीं दिया तो मुख्तार अब्बास नकवी चुनाव प्रचार में झाल बजायेंगे.यूँ भी मुख्तार अब्बास नकवी कोई मॉस लीडर तो है नहीं कि उनके प्रचार से कुछ असर पड़ेगा. दरअसल ये भूमिहार समाज के प्रति भाजपा के संकीर्ण दृष्टिकोण को दर्शाता है. भूमिहार जिस अंधभक्ति से भाजपा को अपना वोट अर्पित करता आया है कि भाजपा इस कम्युनिटी के वोट के महत्व को ही भूल गई है.इसलियी हर राज्य में हर मोड़ पर भू-समाज की उपेक्षा कर रही है.लेकिन भविष्य परिणाम गंभीर हो सकते हैं और भू-समाज दूसरी दलों की तरफ रुख कर सकती है.इसलिए भाजपा को समय रहते संभल जाना चाहिए.भूमिहारों को नज़रंदाज़ करना भारी पडेगा.              

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