उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा नाम केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा का उछाला गया. मीडिया ने उन्हें मुख्यमंत्री घोषित भी कर दिया था. लेकिन अचानक बाजी पलटी और योगी सीएम बन गए. पूर्व की कई रिपोर्ट में कहा गया कि आरएसएस के रूकावट डालने की वजह से मनोज सिन्हा का मुख्यमंत्री बनना रूक गया. लेकिन अब ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ ने एक बड़ा खुलासा किया है जिसके मुताबिक़ ये फैसला पूरी तरह से मोदी और शाह का था. मनोज सिन्हा के नाम का जानबूझकर उछाला गया. बिजनेस स्टैंडर्ड में ‘राधिका रामशेषन’ ने अपनी इस रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी के कुछ नेताओं ने मनोज सिन्हा के बारे ये भ्रान्ति फैलाकर रास्ता काटा कि सिन्हा का ताल्लुक भूमिहार जाति से है जो राजनीतिक रूप से हाशिये पर है। वह अपने क्षेत्र में भूमिहार विधायकों को भी नहीं जिता पाते हैं। रिपोर्ट के कुछ अंश –
मोदी और शाह के दिमाग में लंबे समय से योगी आदित्यनाथ का नाम था लेकिन अपनी दीर्घकालिक योजना को अड़चनों से बचाने के लिए उन्होंने एक समय पर एक ही दांव चलना बेहतर समझा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन 18 मार्च को जब योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री घोषित किया गया तो भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के करीबी नेताओं के अलावा पार्टी में किसी को इसकी भनक तक नहीं थी। शाह के कुछ करीबी नेताओं को भी टुकड़ों में इसकी खबर मिली। यह इस बात पर निर्भर था कि किसे कब कितनी जानकारी होनी चाहिए। भाजपा में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था संसदीय बोर्ड के कुछ सदस्यों और शाह के करीबियों से हुई बात से तो यही लगता है कि मोदी और शाह ने ही योगी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। और पार्टी के दूसरे नेताओं और पदाधिकारियों को रस्मी तौर पर इस फैसले की जानकारी दी गई। लगता है कि योगी को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला पूर्वनिर्धारित था। इस पद के लिए जो चार नाम उभरे थे उनमें योगी का नाम भी था। इनमें गृह मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख और फूलपुर के सांसद केशव प्रसाद मौर्य और रेल एवं संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा का नाम भी शामिल था। इन नामों को जानबूझकर उछाला गया ताकि योगी को सुर्खियों से दूर रखा जा सके। पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘2002 से ही पार्टी के भीतर कई ताकतें उनके खिलाफ सक्रिय थीं जिनको आशंका थी कि वह उत्तर प्रदेश में भाजपा को अस्थिर कर सकते हैं।’लब्बोलुआब है कि अगर मोदी और शाह ने योगी का नाम आगे नहीं बढ़ाया होता तो उनका मुख्यमंत्री बनना मुश्किल था।


