लालू यादव उन चंद राजनीतिक हस्तियों में से एक हैं जो अपने पूरे राजनीतिक सफर के दौरान आए तमाम उतार-चढाव के बावजूद हमेशा मीडिया की सुर्ख़ियों में रहे.मीडिया के मिजाज़ के हिसाब से वे चटपटे बयान देते हैं और फिर वो सुर्ख़ियों में छा जाता है. लेकिन अफ़सोस उनके ज्यादातर बयान अटपटे ही होते हैं.गंभीर-से-गंभीर मुद्दे पर उनके चुटकुले प्रसिद्ध हैं.मसलन हेमा मालिनी के गाल से सड़क की तुलना करना उसका एक छोटा सा उदाहरण है. ऐसे सैंकड़ों बयान उनके नाम दर्ज है. 
लेकिन नॉनसीरियस/नॉनसेंस टॉक करने वाले लालू यादव का ज़मीर अचानक से जाग हो गया और इसका पूरा श्रेय तमिलनाडू की दिवगंत मुख्यमंत्री अम्मा यानी जयललिता को जाता है.लालू यादव ने जयललिता को श्रद्धांजली देते हुए एक अंग्रेजी अखबार को इंटरव्यू दिया. अखबार ने बातचीत से जो सार निकाला उसके आधार पर शीर्षक बनाया – She would never talk nonsense :Lalu. इस खबर को खुद लालू यादव ने ट्वीट किया. 
लेकिन ट्वीट करते समय वे भूल गए कि अपने जीवनकाल में उन्होंने कितना नॉनसेंस टॉक किया है. धत्त बुरबक- धत्त बुरबक जैसे नॉनसेंस टॉक करके पूरी दुनिया के सामने बिहारियों की इज्जत को तार-तार किया.तब आपको अम्मा का की सलीकेदार बातचीत और उसकी तुलना में अपनी नॉनसेंस टॉक का भान नहीं हुआ.
बहरहाल अम्मा जाते-जाते नॉनसेंस टॉक वाले लालू यादव के सेंस को तो जगा गयी,लेकिन उससे बिहारियों की जो छवि तार-तार हुई है उसकी भरपाई नहीं होगी.क्योंकि बाहर वाले एक पढ़े – लिखे बिहारी में रिक्शेवाले का अक्स और लालू का नॉनसेंस टॉक खोजते हैं.

ज़मीन से ज़मीन की बात – भू-मंत्र