श्रीबाबू रुढिवादी विचारधारा के प्रबल विरोधी – राम बहादुर राय
बिहार केसरी और बिहार के पहले मुख्यमंत्री की जयंती पटना समेत कई जगहों पर मनाई गयी तो इस मामले में देश की राजधानी दिल्ली कैसे पीछे रह सकता था. इसीलिए दिल्ली में रविवार 23 अक्टूबर को एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया और डॉ.श्रीकृष्ण सिंह को याद किया गया.
कार्यक्रम राजेंद्र भवन आडिटोरियम में हुआ जिसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के निदेशक राम बहादुर राय समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.
इस मौके पर राम बहादुर राय ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में डॉ.श्रीकृष्ण के नाम से उनके पुस्तकों के लिए एक अलग से खंड बनाने की बात कही ताकि आने वाली पीढ़ी उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा ले सके.
अपने संभाषण में राम बहादुर राय ने कहा कि श्रीबाबू न केवल एक राजनीतिज्ञ थे बल्कि वे असाधारण प्रतिभा के धनी, समाज विज्ञानी, और रूढ़िवादी विचारधाराओं के प्रबल विरोधी भी थे.
भारतीय विश्वविद्यालय परिसंघ के अध्यक्ष डॉ प्रियरंजन त्रिवेदी ने कहा कि बिहार में जो शैक्षणिक क्रांति श्रीबाबू के नेतृत्व में शुरु हुई थी, उसी का परिणाम है कि आज भी बिहार बौद्धिक उँचाईयों के शिखर पर है.
समाजसेवी एवं सुप्रिम कोर्ट के अधिवक्ता रामनगीना सिंह ने कहा कि श्रीबाबू के नेतृत्व में बिहार देश भर में अग्रणी राज्य था।
कार्यक्रम के दौरान परशुराम संदेश पत्रिका का विमोचन और प्रतिभाशाली बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया। मंच संचालन यू के शर्मा और अध्यक्षता मनीष कुमार शेखर ने किया.



