औरंगाबाद. गिरिराज सिंह के निशाने पर अक्सर विपक्ष के नेता आते रहते हैं. लेकिन इस बार नेता की बजाए बर्थ डे केक आ गया है. उन्होंने जन्मदिन पर केक काटने के मुद्दे पर कहा कि हिन्दुओं को केक काटने की परंपरा छोड़ देनी चाहिए. उसकी बजाये उन्हें जन्मदिन पर मंदिर जाना चाहिए. भारतीय संस्कृति में केक काटने की कोई परंपरा नहीं है। यह खेदजनक है कि हम पश्चिमी संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि तथ्य यह है कि हमारी संस्कृति अपने आप में मजबूत है और पुरानी है।” उन्होंने कहा, “मैं आप सबसे यह शपथ लेने का अनुरोध करता हूं कि जन्मदिन मनाने के लिए आप मंदिर में जाकर पूजा करें.” केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति ग्रामीण इलाकों में तेजी से खत्म हो रही है और यह चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि इन दिनों बच्चे अपनी मां को मां या मइया कहने के बजाय मम्मी कहने लगे हैं और पिता को बाबू जी और पिता जी कहने के बजाय पापा कहते हैं.
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