बड़ी बरामदगी की उम्मीद: नोटबंदी के बाद से पुलिस की सक्रियता से नक्सली ठिकानों से 70 करोड़ से ज्यादा की रकम बरामद की गई है। अभी कुछ और बड़ी बरामदगी की उम्मीद है जिसके बाद पुलिस खुलासा कर सकती है। खुफिया विभाग के मुताबिक नक्सली हर साल करीब 1400 करोड़ लेवी (वसूली) के जरिए उगाहते हैं। इस रकम को अमूमन जंगल में बने बंकरों में छिपाकर रखा जाता है।
हाल में जब्त राशि को जमीन में बने बंकरों से ही बरामद किया गया था। राज्य सरकार की तैयारियों और पुलिस की सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि नक्सलियों द्वारा ठेकेदार और उद्योगपतियों से वसूले गए करीब एक हजार करोड़ के नोट अब रद्दी होने जा रहे हैं।
पुलिस के पोस्टरों में कहा गया है कि नक्सली जनधन खातों के जरिये रकम वैध कराना चाहते हैं। सरकार ऐसे खातों पर विशेष नजर रख रही है। ग्रामीणों को आगाह किया गया है कि वे नोट बदलने के काम में नक्सलियों का साथ न दें।
केंद्रीय गृह मंत्रालय में नक्सल मामलों के निदेशक आईएएस अधिकारी आनंद जैन ने आईबी की सूचना पर झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि नक्सलियों को लेवी के रूप में झारखंड में सबसे अधिक राशि मिलती है।
दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ है और फिर बिहार। नक्सलियों के आर्थिक तंत्र पर नकेल के लिए सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी के अफसरों को भी सतर्क किया गया है। नक्सल प्रभावित इलाकों में बैंकों, एटीएम और र्आिथक संस्थान की सुरक्षा बढ़ा दी है। राज्य खुफिया एजेंसी ने भी झारखंड के सभी आरक्षी अधीक्षकों को पत्र लिखकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीण इलाकों में जन-धन खाताधारकों को लेवी की रकम खपाने के लिए धमकी दे रहे हैं। बुजुर्गों को खासतौर से निशाना बनाया जा रहा है। पेट्रोल पंप मालिकों पर नोट बदलने का दबाव डालने की सूचना है। साथ ही वे खुद को एनजीओ के रूप में दिखाकर नोट बदलवाने की फिराक में हैं।



