बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण सिंह(श्री बाबू) महज आधुनिक बिहार के निर्माता ही नहीं सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन के मनीषि भी थे। 
दुर्भाग्य है कि आज इनकी जयंती में शामिल राजनीतिक दल और राजनेता या संगठन बस अपने-अपने तरीके से औपचारिकता भर निभा रहे हैं। दुःख होता है कि सिर्फ जयंती पर ही श्रीबाबू सबको क्यों याद आते हैं? 
आज बिहार को श्रीबाबू की बहुत जरुरत है वर्षों से ठप्प बिहार के विकास के लिए,सामाजिक और जातीय समरसता के लिए और बिहार के गौरव को पुनर्स्थापित कराने के लिए। 
दुःख के साथ बिहार की धरती के इस अन्यतम लाल को आज उनकी जयंती पर बारम्बार प्रणाम! 

(दिलीप कुमार की एक टिप्पणी) 

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