भूमिहारों की अपनी पार्टी के संदर्भ में ‘भूमंत्र’ में जब से भूमिपुत्र ‘शैलेन्द्र’ का आलेख आया है तब से विमर्श का सिलसिला ही चल पड़ा है. ज्यादातर भूबंधू शंका-आशंका के बावजूद ‘भूमिहार पार्टी’ के गठन की जरुरत को मान रहे हैं. इस बारे में सभी एकमत है कि इससे भूमिहार समाज को फायदा होगा और कोई भी राजनीतिक दल हमें नज़रंदाज़ करने की हिम्मत नहीं करेगा. लेकिन भूमंत्र के कट्टर पाठक ‘अमित प्रिय रंजन’ इससे अलग राय रखते हैं. उनके विचार से ‘भूमिहार पार्टी’ बननी ही नहीं चाहिए.इस बारे में उन्होंने एक टिप्पणी की है जिसे पोस्ट की शक्ल में बिना किसी संपादन के हम यहाँ ज्यों-के-त्यों पेश कर रहे हैं. (परशुराम)
अमित प्रिय रंजन-
अगर आप अपने देश के इतिहास के पन्ने पलट कर देखें तो जो वी जाती आधारित और क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियाँ बनी है सब के सब ने सुरुआत तो सामाजिक मद्दों के साथ किया लेकिन बहुत जल्दी ही अपनी नेताओं के बस एक पर्सनल प्राजेक्ट बन कर रह गए , उदाहरण के तौर पे SP, RJD, TMC, DMK, AIDMK, BJD, NCP, MNS, TDP, TRS, LJP, Congress, शिव सेना, अकाली, ये जितने भी पार्टियाँ बनी या फिर बनायी गयी वो सब के सब समय के साथ अपने नेता के सिर्फ़ पर्सनल प्रॉपर्टी बन के रह गये जिनका का ना तो कोई सिद्धांत होता है ना कोई आदर्श और इन पार्टियों के जो तथाकथित नेता होते है वो कुछ करोड़ रुपए ले कर अपने कुछेक MP और MLA का इस्तेमाल कर के सिर्फ़ सरकारें बनाने और गिराने का खेल खेलते हैं, और लीडेरशिप के लिए बस अपने नेता के ख़ानदान के अलावा किसी को आगे आने नहीं देते, इन सारी पार्टियों की सुरुआत तो अपने सामाजिक विकास के लिए हुआ लेकिन आगे जा कर क्या होता है उसके दर्जनों उदाहरण हमारे सामने है, अगर विकास होता वी है तो समाज का नहीं बल्कि सिर्फ़ और सिर्फ़ पार्टी के नेता का, उनके रिस्तेदारो, उनके पूरे ख़ानदान का, आम जनता और कार्यकर्ता बस उनके कैड़र वोट बैंक और सेवक बन के रह जाती है………क्या होगा अगर भूमिहारो की वी एक राजनीतिक पार्टी बन जायेंगी तो, शायद कुछ MLA वी जीत जाएँगे, और आश्चर्य नहीं होगा जब हमारे पार्टी सुप्रीमो चंद रूपयों के ख़ातिर लालू जैसो के चरणों में माथा टेक कर हमारे वोटों की दलाली कर लालू जैसे दूरदाँत राक्षसों के सेवा में लग जाये,,,, क्योंकि आज तक सभी छोटी सामाजिक राजनीतिक पार्टियों का यही हश्र हुआ है, और एक आम भूमिहार पार्टी सुप्रीमो के ख़ानदान का सेवक बन कर रह जाएगा भले वो अनपढ़ गँवार या फिर नौंवी फ़ेल ही क्यों ना हो, और आज हम भूमिहारो जो अपना स्वाभिमान और आत्मसम्मान है वो भी गवाँ देंगे!! यही एक कड़वी सचाई है हमारे देश की छोटी सामाजिक और राजनीतिक पार्टियों की, जिनका ना तो कोई सिद्धांत होता है और ना ही कोई विचारधारा……..इसलिए मैं अपने भूमिहार भाईयों को आगाह करता हु ऐसे किसी भी बहरूपिये से जो आज शायद आपके मन में अपनी पार्टी का लालच दिखा कर जातिवाद का ज़हर भर कर हमें मानसिक और मोरल ग़ुलामी की तरफ़ ले जाएगा और कल को हमारा सुप्रीमो बन कर हमें ही शोषित करेगा…….प्रणाम ????????


