गया.बारा नरसंहार की 25 वीं बरसी पर मारे गए लोगों को रविवार को श्रद्धांजली अर्पित कर याद किया गया.इस मौके पर नहर पर जाकर मृतकों की याद में बने स्मारक पर पुष्पांजलि व माल्यार्पण करते हुए सामूहिक श्रद्धांजलि दी गयी.उसके बाद उनकी आत्मा की शांति के लिए वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन भी किया गया.

गौरतलब है कि 25वर्ष पहले गया ज़िले के बारा गांव में माओवादियों ने 12 फरवरी 1992 को भूमिहार जाति के 35 लोगों की हत्या कर दी थी. माओइस्ट कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के सशस्त्र दस्ते ने एक नहर किनारे ले जाकर उनके हाथ-पैर बांधकर उनकी गला रेतकर हत्या कर दी थी.हाल ही में इसी हत्याकांड के चार सजायाफ्ता मुजरिमों की फांसी की सजा को राष्ट्रपति ने माफ कर उम्रकैद में तब्दील कर दिया था जिससे वहां के ग्रामीण और किसान मायूस हुए.

25 बरसी में श्रद्धांजलि अर्पित करने स्मारक स्थल पर राकेश सिंह, मदन सिंह, धनंजय सिंह आदि ने घटना की स्याह रात (12 फरवरी 1992) को याद करते हुए कहा कि वह काली और भयावह रात किसी के जीवन में न आए। भगवान से यही प्रार्थना करते हैं। उस रात असुरी शक्तियां घटना की रात गाव में अट्टाहास कर रही थी। चारों ओर मौत तांडव कर रहा था। उस घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को नौकरी देने की बात कही गई थी। ऐसे ही लोग जो नौकरी से आज भी वंचित हैं का कहना था कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नौकरी दी जा सकी है। ऐसे में नरसंहार की पीड़ा से नौकरी न मिल पाने से कम दुखदायी नहीं। सरकार द्वारा घोषित कई सुविधाएं आज भी गाव नहीं मिली है। न तो मारे गए के परिजनों को आज तक कोई सुविधा नसीब नहीं हो सकी है। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि एक विशेष जाति के लोग प्रायोजित आतंक का शिकार होते रहा है। इस जाति के लोगों को आरक्षण के माध्यम से भी सरकार द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। वक्ताओं ने समाज को एकजुट और संगठित होकर अन्याय के विरुद्ध आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। श्रद्धांजलि सभा को ब्रह्मार्षि समाज के सचिव सुनील शर्मा, पूर्व जिला पार्षद सुमंत कुमार, सत्येन्द्र शर्मा, बैजू शर्मा, विनोद शर्मा, मिथिलेश शर्मा, राकेश सिंह सहित कई लोगों ने संबोधित किया। अध्यक्षता भोजपुर से आए वकील चौधरी व संचालन लारी के पूर्व मुखिया पैक्स अध्यक्ष जितेन्द्र शर्मा ने किया।

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