बेहद दुखद समाचार मिला कि हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विवेकी राय जी नहीं रहे। उनसे बातें तो कई बार हुई थीं, पर मुलाकात सिर्फ एक बार गाजीपुर में उनके निवास पर हुई थी। वे हिंदी के जितने बड़े साहित्यकार और विद्वान थे, उससे भी ज्यादा सहज उनका स्वभाव था।
गाँव की माटी से जुड़े डॉ. विवेकी राय जी को कभी भी नगरीय तामझाम आकृष्ट नहीं कर पाये, वे अंत तक अपनी माटी से जुड़े रहे। पहली मुलाकात में ही उन्होंने हमारी पुस्तक “16 आने, 16 लोग” पर लेखनी चलाई थी और अपनी तमाम पुस्तकें भी सप्रेम भेंट की थीं।
उनसे जब भी बात होती थी तो अगली बार मुलाकात का वादा भी रहता था, क्योंकि गाजीपुर हमारी ससुराल भी है ……… पर किसे पता था कि अगली मुलाकात तो सिर्फ एक वायदा बनकर रह जाएगी। डॉ. विवेकी राय जी का निधन बहुत कुछ अधूरा छोड़ गया। विनम्र श्रद्धांजलि !! #VivekiRai



