पटना : किसान नेता और अपने दम पर किसान विरोधी उग्रवादी संगठनों से लोहा लेने वाले ब्रहमेश्वर मुखिया की आज आरा में गोली मारकर हत्या कर दी गयी.हत्या को अंजाम तब दिया गया जब वे सुबह चार बजे टहलने के लिए निकले थे.ठीक उसी वक्त घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उनपर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और वे किसानों के नाम पर शहीद हो गए . इस दौरान तकरीबन 40 गोलियाँ चलायी गयी.

घटना के बाद गुस्साए लोगों ने जमकर नारेबाजी की और मौके पर पहुंचे पुलिसवालों से भी उनकी झड़प हो गई. मौके पर पहुंचे भोजपुर के एसपी को भी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा. पुलिस हमलावरों की तलाश कर रही है. उधर, राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी.  उन्होंने कहा, ‘मैं लोगों से संयम बरतने और शांति रखने की अपील करता हूं. वारदात की पूरी जांच की जाएगी.’

राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (विधि व्यवस्था) एस. क़े भारद्वाज ने बताया कि पूरे आरा शहर में धारा 144 लगा दी गई है और उपद्रवियों से सख्ती से निपटने का निर्देश दिया गया है.   इसके अलावा राज्य के जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद सहित रणवीर सेना के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पुलिस अलर्ट जारी कर दिया गया है.

भारद्वाज के अनुसार आरा में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.पुलिस के अनुसार लोगों ने दफ्तरों और आरा रेलवे स्टेशन पर जमकर तोड़फोड़ की. हत्या से गुस्‍साए लोगों ने सड़कों पर हंगामा किया. हत्या के बाद पूरे इलाके में तनाव फैला हुआ है. हालात बिगड़ते देख आरा में धारा 144 लगा दी गई है.

ब्रहमेश्वर मुखिया किसानों के लोकप्रिय नेता थे. वैसे उनकी एक पहचान रणवीर सेना के संस्थापक की भी है. नक्सल समर्थक ग्रुप उनपर कई नरसंहारों का आरोप लगाता रहा है लेकिन दूसरी तरफ किसानों के बीच वे किसी जननायक से कम नहीं. वे बिहार के भोजपुर जिले के खोपिरा गाँव के रहने वाले  थे और 1994 में उन्होंने किसानों को संगठित किया जिसे नक्सल समर्थकों ने रणवीर सेना का नाम दिया और उसपर कई नरसंहारों का आरोप मढ़ा.इसी वजह से ब्रह्मेश्वर मुखिया को नौ साल तक बेवजह जेल में रहना पड़ा.वे जुलाई 2011 में जमानत पर छूटे और उन्होंने राष्ट्रवादी किसान संगठन नाम से संगठन बनाया जिससे राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया और अंततः इसी वजह से उनकी ह्त्या भी हुई.