उत्तरप्रदेश में मुकाबला त्रिकोणीय है.भाजपा,सपा+कांग्रेस और बसपा के बीच कांटे की टक्कर है.अलग-अलग सर्वे के परिणाम भी इसी ओर इशारा करते हैं.लेकिन भाजपा नेता और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ऐसा नहीं मानते. उनका मानना है कि भाजपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बनेगी और उत्तरपदेश में भाजपा का किसी से कोई मुकाबला ही नहीं.ये बातें उन्होंने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कही.पेश हैं उनका पूरा इंटरव्यू – 
*उ.प्र. विधानसभा चुनाव को किस तरह से देख रहे हैं। चुनाव को लेकर राजनीतिक दल और मतदाता कौन, कितने भ्रम में है? 
@मतदाता किसी तरह के भ्रम में नहीं है। वह राज्य में बदलाव का मन बना चुका है। भाजपा भी किसी भ्रम में नहीं है। हम राज्य में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने जा रहे हैं। बाकी कोई और भ्रम में है तो हम नहीं कह सकते। 

*इतने बड़े आत्म विश्वास का आधार क्या है? 
@पिछले दिनों से भाजपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। हमें युवा, महिला, किसान सम्मेलनों में जिस तरह का जन समर्थन मिला है, उससे आश्वस्त हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कामकाज से प्रदेश की जनता और देश के लोगों में उत्साह बढ़ा है। भारत की छवि निखरी है और लोग इसे महसूस कर रहे हैं। 
*उ.प्र. में सपा सरकार सत्ता में है और सत्ता पाने की मुहिम में है। सरकार का नारा है ‘विकास बोलता है। कांग्रेस के साथ गठबंधन भी।’ कहीं आप अनदेखी तो नहीं कर रहे हैं? 
@पिछले चुनाव में लोगों ने सपा को बड़े उत्साह और उम्मीद से वोट दिया था। लोगों को लगा था कि विदेश से पढ़कर आए अखिलेश यादव अलग तरह की सरकार चलाएंगे। जातिगत राजनीति से अलग कुछ नया करेंगे, लेकिन उ.प्र. के लोग निराश हुए हैं। 
*यानी अखिलेश उ.प्र. की सरकार नहीं चला पाए? 
@व्यक्ति नहीं, मुद्दों पर केन्द्रित बात करना चाहता हूं। इसलिए मुझे अपनी बात पूरी कर लेने दीजिए। सीधी सी बात है कि कानून का राज होगा तो निवेश आएगा और विकास होगा। अखिलेश के नेतृत्व वाली सरकार इसमें फेल रही है। मथुरा में जवाहर बाग की घटना, मुजफ्फरनगर दंगा, सहारनपुर में व्यभिचार, मुख्यमंत्री आवास से 200 मीटर की दूरी पर महिला से बलात्कार और उसकी हत्या, गाजीपुर से लेकर गाजियाबाद तक जमीन, प्लॉट, मकान पर समाजवादी पार्टी से जुड़े तत्वों के कब्जे। इन सबने एक रिकार्ड बना दिया है। 
*लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश तो साफ-सुथरी सरकार के चेहरे पर चुनाव मैदान में हैं? 
@यह केवल दिखाने के लिए है। आचार संहिता लागू होने और समाजवादी पार्टी की अंदरुनी लड़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने पहली चुनावी सभा अमेठी में की है। उ.प्र. सरकार के निवर्तमान मंत्री गायत्री प्रजापति के समर्थन में। इसी गायत्री प्रजापति को अखिलेश ने अपने मंत्रिमंडल से हटा दिया था। इसलिए यहां उ.प्र. के मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार और साफ-सुथरी बनाई गई छवि पर कुछ कहने की जरूरत नहीं है। 
*सपा का भी आरोप है कि मुजफ्फरनगर दंगे में जिन पर सवाल था भाजपा और केन्द्र की सरकार ने उन्हें बड़ा हीरो बना दिया? 
@इस सवाल पर बाद में आऊंगा। पहले कहना चाहते हैं। आप देखिए उ.प्र. में जिस तरह से सिपाही, लेखपाल, दरोगा की भर्तियां हुई हैं, यहां तक कि राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में एक क्षेत्र और किस्म के लोगों के चयन में धांधली हुई, अप्रत्याशित है। आजादी के बाद से अब उ.प्र. में ऐसा नहीं हुआ था। हम इसके लिए न्यायपालिका के आभारी हैं। लोकायुक्त जैसी संस्था का हलफनामा भी बड़ा सवाल है। सरकार ने नारा तो दे दिया कि विकास बोलता है, लेकिन यह विकास कहीं जमीन पर दिखता नहीं। 
*मुजफ्फरनगर दंगे पर भाजपा पर लग रहे आरोप भी तो सवाल हैं? 
@उ.प्र. में समाजवादी पार्टी की सरकार है। सरकार ने जांच कराई है। उसे दंगे की जांच रिपोर्ट पर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। दोषियों के नाम बताना चाहिए और उन पर कानून का शिकंजा कसना चाहिए। 
*सपा ने कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया है? 
@यह तो अवसरवादी गठबंधन है। भाजपा के बढ़ते जनाधार और प्रधानमंत्री मोदी जी की छवि से घबराकर किया गया है। कुछ स्वार्थी राजनीतिक ताकतें इसमें जुड़ना चाहती थी, लेकिन स्वार्थों के आपसी टकराव के कारण नहीं जुड़ सकीं। वैसे भी उ.प्र. में कांग्रेस खत्म हो चुकी है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि गठबंधन का राजनीतिक स्वार्थपूर्ति में कोई फायदा मिल पाएगा। 
*ऐसे में भाजपा का सीधा मुकाबला किस दल से होगा। बसपा से या फिर समाजवादी-कांग्रेस गठबंधन? 
@उ.प्र. में भाजपा का किसी से मुकाबला नहीं है। बसपा और सपा-गठबंधन में मुकाबला है। ये दोनों राज्य में दूसरे नंबर की पार्टी बनने के लिए लड़ रहे हैं। यह चुनाव एक तरफा और भाजपा के पक्ष में है। 
(अमर उजाला से साभार)

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