प्रजातंत्र में यकीन का ढकोसला करने वालों की भारत देश में कोई कमी नहीं. वामपंथ और दलित चिंतकों का तो इस मामले में कोई जवाब नहीं. अपना हित उन्हें जहाँ दिखता है वहां मुंह मारने चल पड़ते हैं. महिषासुर देवी दुर्गा हो जाती हैं और माँ दुर्गा को महिषासुर बनाते इन्हें देर नहीं लगती.फर्जी प्रजातंत्र के समर्थकों को जहाँ अपना हित सधता दिखता है वहीं दौड़े चले जाते हैं और देशभर में कुछ ऐसे हंगामा करते हैं जैसे उससे बड़ा मुद्दा कोई नहीं. लेकिन जब बिहार के नवादा जिले में सत्तारूढ़ दल के बलात्कार के आरोपी राजबल्लभ यादव के गुर्गे इंग्लिश पथरा गाँव के लोगों को वोट नहीं देने देते तो सब को सांप सूंघ जाता है. क्योंकि मामले में जातीय समीकरण फिट नहीं बैठता.इसलिए ये ख़बरें राष्ट्रीय मीडिया से भी सिरे से गायब हो जाती है. लेकिन प्रगतिशील लोगों के संगठन ने जब जंतर-मंतर पर धरना – प्रदर्शन किया तो चैनल,अखबार और नेताओं की नींद भी टूटी. दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें-









