संदर्भ – लालू यादव के नाम ‘रणवीर’ का खुला पत्र!
भू-मंत्र डॉट कॉम पर लालू यादव के नाम रणवीर की खुली चिठ्ठी प्रकाशित हुई. भू-मंत्र के पाठक जानते ही हैं कि रणवीर समय-समय पर देश- समाज के लोगों को चिठ्ठी लिखते रहता है.पूर्व में पीएम मोदी,गिरिराज सिंह, डॉ. अरुण कुमार, हाफ़िज़ सईद आदि को खत के जरिए उसने अपना पैगाम पहुँचाया था.उसी कड़ी में लालू यादव को भी रणवीर ने चिठ्ठी लिखी और क्यों न लिखे दोनों का संबंध भी बहुत पुराना है.बहरहाल इस चिठ्ठी पर विरोधियों को मिर्ची लगना स्वाभाविक ही थी. सो लगा. उसके बाद कई अभद्र टिप्पणियाँ आयी और उलटे-सीधे कुतर्क वाले कमेंट भी किये गए जिसका जवाब देना भी रणवीर ने सही नहीं समझा.लेकिन इसी कड़ी में ‘चंदन कुमार’ नाम के एक लालू फैन का कमेंट पढकर रहा न गया तो उसे रणवीर की तरफ से जवाब दिया गया. आप भी पढ़िए और विरोधियों की समझ का अंदाज़ा लगाइए. ये भी जानिए कि अंदरखाने में ये भूमिहारों के लिए अपने अनुयायियों में किस तरह का बिन सिर-पैर का जहर भरते हैं. इस आपत्तिजनक कमेंट को सिर्फ इसलिए पोस्ट किया जा रहा है ताकि आप बीमार और अज्ञानी लोगों की मनस्थिति का अंदाज़ा लगा सके. फिर ये बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से कही गयी है तो उसका जवाब ही सार्वजनिक तौर पर जाना चाहिए. पहले चंदन कुमार नाम के लालू फैन का भू-मंत्र के पोस्ट पर कमेंट पढ़िए:-
चंदन कुमार,लालू समर्थक :
बिहार 3% भूमिहार चाहता हैं कि वो राज करे ,, जिसे दोस्त बनाता हैं उसी के पीठ में छुरा भोक देना इसका आदत रहा हैं.. होगा क्यों नही अकबर +जोधाबाई ( हिन्दू+मुस्लिम,) का वंसज जो ठहरे.. कुर्मी यादव इसके निशाने पर रहे ..दलित को भी निर्मम हत्या की.. ये तो लालू जी मेहरबानी ही हैं वरना 3% भमिहर को खत्म करने में उन्हें 3 घण्टे नही लगते.. सब जगह गरीब की जमीन घर कब्जा कर लेना इनका पेसा रहा हैं.. कोई सामान्य परिवार bhu को घर किराये पे नही देना चाहता की हड़प लेगा.. वो bhu रहम की उम्मीद करता हैं .. नवादा जहानाबाद शेखपुरा वारिसलीगंज बेगूसराय पटना नवगछिया मोकामा मुजफ्फरपुर वैशाली इन सब जगहों पर इन्होंने बरसो उत्पात मचाया जो किसी से छुपा नही.. 90 के बाद जब इनको दलित कुर्मी यादव से टकराना पड़ा तब इनका होस उड़ गया.. अब रहम की उम्मीद या मेल मिलाप का उम्मीद करते हैं.. लालू जी गठबंधन में हैं या यू कहे नितीश जी दयालु कुछ ज्यादा हैं वरना भूमिहार का सफाया तय था.
रणवीर की तरफ से भू-मंत्र का जवाब :
@chandan Kumar एक तो आपकी जानकारी गलत है. थोड़ा इतिहास खंगालिये. भूमिहार ब्राह्मणों का इतिहास उतना ही पुराना है जितना पुराना खुद इतिहास है.सरल शब्दों में भूमिहार जाति के इष्टदेव ‘भगवान परशुराम’ हैं. इसलिए आपका अकबर+ जोधाभाई का फंडा बेकार है. ये फंडा राजपूतों पर आजमाईयेगा तो कुछ तर्क का आधार भी बनेगा. दूसरी बात कि बिहार में भूमिहार जाति कुल जनसँख्या का 7% है न कि 3%. दूसरी बात कि कुर्मियों के साथ भूमिहारों की वैसी कोई दुश्मनी नहीं रही. नीतिश कुमार को भूमिहारों का पूरा समर्थन हाल-हाल तक मिला और अब भी हासिल है.अभी लोग इसलिए दूर हैं कि क्योंकि वे घोर विरोधी लालू यादव के साथ खड़े हैं.इसमें भी एक राज है जो बहुत जल्द पता चलेगा और चाणक्य की बुद्धि का अंदाज़ा दुनिया को होगा.
रही बात नरसंहारों की तो इसकी शुरुआत भू-समाज ने नहीं की. नरसंहारों का इतिहास पढेंगे तो बिहार में पहला दलितों का नरसंहार बेलछा गाँव में कुर्मियों ने किया था.तब ग्यारह हरिजनों को गोलियों से भुनकर आग में झोंक दिया गया. कांग्रेस की नेता इंदिरा गांधी तब हाथी पर सवार होकर इस गाँव में आयी थी और सत्ता में उनकी वापसी हुई. हालांकि बेलछी गाँव की हालत में कोई सुधार नहीं हुए.वो सिर्फ राजनीति करने का अखाड़ा बनकर रह गया. वहां से बिहार में नरसंहारों का सिलसिला शुरू हुआ जिसमें कई बेगुनाह भी मारे गए.लेकिन इसका पूरा भार ‘रणवीर सेना’ पर डाल दिया गया. ये संगठन यादवों और दलितों के खिलाफ नहीं बल्कि फसल की लूटपाट करने वाले नक्सलियों के खिलाफ थी.लालू यादव ने इसपर खूब रोटी सेकी और दलितों-मुस्लिम और यादव वोटों का ध्रुवीकरण किया.
लालू यादव ने भूमिहारों को मिट्टी में मिलाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. इसलिए लालू की दयालुता का बखान तो आप मत ही कीजिये. खत्म करना उसके क्या किसी के बस में नहीं है. रहम की उम्मीद कमजोर करते हैं. यहाँ तो मामला ही उल्टा है. मोदी को हराने के लिए जैसे सारा विपक्ष लगा हुआ है , ठीक वैसे ही भूमिहार को हराने के कई जातियां साथ आयी. फिर भी वजूद नहीं मिटा पाए और न मिटा पायेंगे. बहरहाल अपने कहे शब्दों पर दुबारा विचार कीजिये और बंद मानसिकता और रटे – रटाए शब्दों से तौबा कीजिये. कुतर्क और गलत इतिहास बताकर आप सत्य को नकार नहीं सकते. फिर गुंडे-बदमाश,उत्पाती और कुकर्मी किस जाति में नहीं होते. उसके आधार पर आप पूरे जाति का आंकलन नहीं कर सकते.श्रीकृष्ण ने तो ऐसे ही लोगों से त्रस्त होकर पूरे यदुकुल को ही विनाश की तरफ धकेल दिया था.यदुकुल फिर मदिरापान किये हुए मदमस्त हाथी की तरह हो गया है.संभला नहीं तो फिर कोई श्रीकृष्ण ही विनाश का कारण बनेंगे जिसे लाने वाला कोई चाणक्य ही होगा.धीरज रखिये, पता चलेगा कि कौन किसके रहमो-करम पर है.




