लखनऊ/पटना. उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी के बाद हंगामा बरपा हुआ है. प्रशासनिक फेर-बदल हो रहे हैं और लगभग हरेक महकमे में हडकंप मचा हुआ है. लेकिन सबसे ज्यादा हंगामा पुलिस विभाग में मचा हुआ है. ख़बरों के मुताबिक़ तकरीबन सौ से अधिक पुलिसवाले अबतक सस्पेंड हो चुके हैं. बहरहाल जब कोई नया मुख्यमंत्री या नयी सरकार आती है तो ये सब तो होता ही है. सपा-बसपा सरकार के आने – जाने के वक़्त यूपी की जनता इस खेल को देख चुकी है. बहरहाल इस बार भी ऐसा ही हो रहा है लेकिन एक आईपीएस अधिकारी के ट्वीट के बाद हंगामा मच गया और पूरे देश की मीडिया का ध्यान बरबस उस बयान पर टिक गया. दरअसल यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार ने 22 मार्च को ट्वीट कर कहा था कि ”कुछ वरिष्ठ अधिकारियों में उन सभी पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंड/लाइन हाजिर करने की जल्दी है जिनके नाम में ‘यादव’ है।” उसके बाद ही हंगामा शुरू हो गया और बाद में अधिकारी ने अपना ट्वीट हटा भी दिया. लेकिन तबतक लोग उसका स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर वायरल कर चुके थे.
हालाँकि बाद में हिमांशु कुमार ने सफाई भी दी,लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. अब तो अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें सस्पेंड भी कर दिया गया है. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ये बज्ज क्रियेट हुआ कि शायद हिमांशु जाति से यादव हैं और इसलिए ऐसी बात कह रहे हैं. उसपर अखिलेश यादव से लेकर तेजस्वी यादव ने इसका समर्थन कर दिया तो शक की कोई गुंजाइश नहीं रह गयी. यही वजह है कि उन्हें बिहार का यादव समझ लिया गया. लेकिन मामला उलटा निकला. पड़ताल में पता चला कि हिमांशु यादव नहीं बल्कि बिहार के भूमिहार हैं.वे मूलतः पूर्वी चंपारण के हैं और उनके पिता का नाम मनोज कुमार सिंह है. तब जाकर साफ़ हुआ कि इस बार यूपी के यादवों को बिहार के भूमिहार का साथ मिला है. इस पूरे प्रकरण पर रिसर्च स्कॉलर अखंड प्रताप राय सोशल मीडिया पर चुटकी लेते हुए लिखते हैं – “सीनीयर सुप्रीडेंट आफ पुलिस हिमांशु कुमार के उपर हमको पहले ही शक था कि हों न हो ई भूमिहार ही है तभी बेगानी की शादी में अब्दुल्ला बना है अंततः हमारा शक सही निकला ”
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