अवैध बूचड़खानों के लिए कौन जवाबदेह है?
अखण्ड प्रताप राय,रिसर्च स्कॉलर – अवैध कत्ल खाने बंद हो गये , ये तो बहुत अच्छी बात है मगर क्या केवल इन कत्लखानों का बंद होना ही पर्याप्त है !!! केवल कत्लखानों का बंद होना ही अगर पर्याप्त है तो इन बंद कत्लखानों के साथ साथ वो सवाल भी बंद हों जाएंगे जो इन कत्लखानों से जुड़े हैं जैसे कि , इतनी बड़ी संख्या में अवैध बूचड़खाने चल रहे थे तो इन अवैध बूचड़खानों में आने वाले पशु भी अवैध ढंग से आते होंगे , इनसे जुड़ी मसीन ट्रांसपोर्टेशन भी अवैधानिक होगा मतलब एक शहर में जहां छोटे से तहसील में भी दो दर्जन राजपत्रीत अधिकारी नियुक्त होते हैं , प्रधान से लगाए विधायक तक कुल सैकडों जनप्रतिनिधि होते हैं उस शहर में हजारों जानवर खामोशी से आते हैं और लाखों कुंतल मांस की खपत हो जाती है और किसी को कुछ पता ही नहीं था कौन जवाबदेह है अब तक चल रहे उन अवैध बूचड़खानों के लिए जब तक उन जवाबदेह लोगों को उनके लापरवाही के लिए दंडित नहीं किया जाएगा तब तक क्या गारंटी है कि सरकार बदलने के बाद वो अवैध बूचड़खाने जो पहले चल रहे थे वो उस समय नहीं चलेंगे जब तक जिम्मेदार लोगों को सजा नहीं दी जाएगी तब तब इस बात की भी क्या गारंटी है कि गुपचुप ढंग से कोई अवैध बूचड़खाना नहीं चल रहा है (अखण्ड प्रताप राय के सोशल मीडिया प्रोफाइल से साभार)


