देश के सीमा के भीतर और बाहर दोनों ही जगहों पर दुश्मनों का खतरा है और इस खतरे से आम भारतीय को बचाने के लिए दिन-रात भारतीय सैनिक जान हथेली पर लेकर इनसे लोहा लेते हैं. लेकिन जब किसी दुश्मन की नापाक साजिश की वजह से हमारे जवान शहीद होते हैं तो सरकार सिवाए घड़ियाली आंसू बहाने के कुछ नहीं करती. दुश्मनों को नेस्तनाबूद करने की बात तो छोड़िये, ये शहीद परिवार को मुआवजा भी इतना देते हैं कि नेताओं को गालियां देना का मन करता है कि शहीद भूमिपुत्रों को 5 लाख की भीख देते शर्म नहीं आती भो.. के! सोंचिये वर्तमान परिदृश्य में पांच लाख की क्या कीमत होती है. इतनी राशि तो श्राद्धकर्म में ख़त्म हो जाती है. इसमें बूढ़े मां – बाप,विधवा पत्नी और पितृसुख से वंचित बच्चों का गुजर-बसर कैसे और कितने दिन होगा? इसी विषय पर रूद्रसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ‘आलोक कुमार’ सरकार की खिचाई करते हुए लिखते हैं –
आलोक कुमार-
फिल्मबाज़ों ,फर्जी लेखकों और खिलाड़ियों पर पैसे उड़ाना बंद करे सरकार । क्रिकेट बंद कर दो , सारे खेल बंद कर दो हमें फर्क नही पड़ेगा , लेकिन अगर एक दिन सैनिक छुट्टी कर देगा तो देश का भूगोल बदल जायेगा । वो जागते हैं ताकि हम सो पाएं , वो मारते और मरते हैं ताकि हम जिन्दा रह पाएं । वो अपने परिवारों से दूर रहते हैं ताकि हम अपने परिवार के साथ रह पाएं । और सरकार इनकी मौत पर भीख देती है इनकी विधवाओं को एक असुरक्षित जीवन देती है । हम सरकार से मांग करते हैं कि सभी सैनिकों के परिवार को 1करोड़ रूपये मुआवजा के तौर पर दे । ताकि उनके परिवार को दर दर भटकना ना पड़े । जय हिंद , जय जवान , जय भारत । शेयर करें और सरकार तक हमारी आवाज को पहुचाएं ।।
कुछ और प्रतिक्रियाएं –
पंकज सिंह :
हरियाणा की सरकार सुकमा के शहीद को 50 लाख देगी और बिहार सरकार 5 लाख… कुछ तो शर्म किजिये नीतीश बाबू.. ????
मनीष कुमार :
जब पटना एयरपोर्ट पर सुकमा हमले में बिहार के 6 शहीद जवानों को अंतिम विदाई दी जा रही थी। उस बक्त बिहार के मुखिया माननीय नीतीश कुमार सिनेमा देखने में व्यस्त थे।हद तो तब हो गयी जब केबिनेट मीटिंग में पिछले साल ये पास हुआ था की बिहार के शहीद जवानो को सरकार मुआवजा की राशी 5 लाख के जगह 11 लाख देगी ऐसे में फिर इस बार 5 लाख ही देने की घोषणा क्यों।


