भूमंत्र के काम को आपमें से कईयों ने बहुत जल्दी भूला दिया.नए सदस्य की अनभिज्ञता समझ में आती है.मगर कई पुराने सदस्य !!! वे बहुत जल्दी में हैं. भूमंत्र को रणवीर सेना, ब्रह्मेश्वर मुखिया और भूमिहार विरोधी साबित करने पर तुले हैं. भूमंत्र ने रणवीर सेना की कहाँ भर्त्सना की? बाबा ब्रह्मेश्वर का जिक्र कहाँ किया? यदि किया तो उसका स्क्रीनशॉट पेश किया जाए. भूमंत्र के जिस स्टैटस को आप तिल का ताड़ बना रहे हैं वो इस तरह से है – “औरतों और बच्चों को मारना कायरता है,चाहे वो किसी भी जाति या विचारधारा से क्यों न हो।रणवीर सेना के रणबांकुरे से एकाध बार ये चूक हुई।”
भूमंत्र का यही बयान था और उसपर वह अडिग है. इसमें पहली बात कि बाबा ब्रह्मेश्वर का जिक्र तक नहीं है. फिर उनका अपमान कैसे हो गया? बाबा ब्रह्मेश्वर के शहादत दिवस पर इसी भूमंत्र ने ट्विटर और फेसबुक पर सघन अभियान छेड़ा था. याद न करने के कारण नेताओं की क्लास ली थी और समर्थन में पोस्ट की बौछार कर दी थी. भूमंत्र के प्रयास से ही आंदोलित होकर एक युवा ने दिल्ली के इंडिया गेट पर पहुंचकर अनोखे अंदाज़ में बाबा ब्रह्मेश्वर को याद किया और उनका साथ कई और युवा साथियों ने देकर इतिहास रच दिया. इस मौके पर जब हम ये सब कर रहे थे तो कई लोगों को इतनी बदहजमी हुई कि वे अनाप-शनाप सवाल करने लग गए. एक सज्जन तो ग्रुप छोड़कर चले गए और फिर स्वत ही वापस आए. अब वही सज्जन अभी सवाल कर रहे हैं थे जो एन वक़्त पर सहयोग की बजाए बाबा ब्रह्मेश्वर के शहादत दिवस पर गायब हो गए. प्रोफाइल पिक से बाबा ब्रह्मेश्वर की पहले तस्वीर लगायी और फिर हटा दी. बहरहाल उससे कोई फर्क नहीं पड़ा और सोशल मीडिया पर पहली बार बाबा ब्रह्मेश्वर को लेकर जबरदस्त जयकारा हुआ. ये बात अलग है कि कम सहयोग की वजह से हम #BrahmeshwarTheWarrior को ट्रेंड कराने में असफल रहे.
दूसरी बात कि हर शब्द के अपने मायने होते हैं. उसे समझने की जरुरत होती है. भूमंत्र के स्टैटस में साफ लिखा है कि ‘रणवीर सेना के रणबांकुरे’ से ‘चूक’ हुई. यहाँ दो शब्द अति महत्वपूर्ण है. रणबांकुरे और चूक. यदि रणवीर सेना की भर्त्सना करनी होती तो उसके लिए रणबांकुरे शब्द का इस्तेमाल कभी नहीं करते है. रणबांकुरे सम्मानसूचक शब्द है. दूसरा शब्द चूक है जिसका मतलब है भूलवश. युद्ध और खून-खराबे में में ऐसा होता है जब बहुत कुछ ऐसा घटित हो जाता है जो आपकी योजना में शामिल नहीं होता. कई बार नायक के आदेश की भी अवहेलना होती है और स्थिति नियंत्रण के बाहर हो जाती है. संभवतया औरतों और बच्चों के मामले में ऐसी ही चूक हुई होगी. क्योंकि ऐसा हो ही नहीं सकता कि आधुनिक परशुराम ब्रह्मेश्वर मुखिया औरतों और बच्चों के कत्लेआम की इजाजत दे दे. यह उनकी इजाजत के बिना हुआ. ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है. युद्ध में गलतियाँ होती है और युद्धोपरांत उसे मानने की प्राचीन काल से प्रथा चली आ रही है. खुद भगवान् परशुराम क्षत्रियों के संहार के बाद तपस्या पर जाया करते थे. पिता के आदेश पर माता की हत्या के बाद उन्हें पुनर्जीवित भी किया और फिर जाकर उसका पश्चताप भी किया. महाभारत के बाद पांडव पुत्रों ने भी पश्चताप किया था और स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण को श्राप के रूप में दंड भुगतना पड़ा था. युद्ध में गलतियाँ होना स्वाभाविक है लेकिन युद्ध के बाद गलतियों को स्वीकारने से जग में मान बढ़ता है.
अतवय जबरदस्ती मुझे रणवीर सेना का विरोधी मत बनाइये. मैं आपसे बड़ा उनका प्रबल समर्थक हूँ. आपसे ज्यादा उनकी मुझे समझ है. इसका प्रमाण दर्जनों लेख और चिठ्ठियाँ है जो रणवीर सेना और बाबा ब्रह्मेश्वर के समर्थन में भूमंत्र ने लिखे हैं. नए नारे दिए और शब्द गढ़े.बाबा ब्रह्मेश्वर की आदमकद प्रतिमा की स्थापना की मांग की. हत्यारों के न पकडे जाने पर सीबीआई और नेताओं की भर्त्सना की. रणवीर के नाम से पीएम मोदी और लालू को चिठ्ठी लिखी. और भी बहुत कुछ. इतिश्री.



