युवा शक्ति ही देश और समाज की दशा और दिशा बदलने में सक्षम है. बदलाव और क्रांति के वही वाहक बनते हैं. इसी मुद्दे पर ब्रह्मऋषि चिंतक ‘राजीव कुमार’ की प्रस्तुति – 
brahamrishi youth

युवा जोश और ब्रह्मऋषि समाज

युवा का मतलब उर्जा और जहाँ ऊर्जा है वहीँ विकास है । ब्रह्मऋषि समाज में भी युवाओं का रुझान सोशल मीडिया के माध्यम से अपने समाज के विकास की ओर बढ़ा है । कुछ अवसरों पर तो युवाओं ने अपनी ऊर्जा और सूझबूझ का प्रयोग अपने समाज को सही दिशा और गति देने के लिए बखूबी किया है और अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाया है ।

युवाओं को बरगलाने वाले राजनीतिक जंतु

युवाओं में भरे इस जोश और ऊर्जा तथा समाज के विकास के प्रति समर्पण का भाव देखकर काफी ख़ुशी की अनुभूति हो रही है । लेकिन साथ ही एक डर भी सता रहा है कि युवा तो ठहरे युवा । कहीं जोश में आकर वो होश न खो दें । उनमें जो जोश है उसको अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए इस्तेमाल करने के लिए कुछ अति महत्वाकांक्षी परिपक्व लोग भी जोर शोर से सक्रीय हो चुके हैं । उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा ही इन युवाओं की ऊर्जा और इनकी गति को गलत दिशा में ले जा सकती है जिससे इन युवाओं को सचेत रहने की जरूरत है । मैंने सोशल मीडिया पर बहुतेरे ऐसे लोग देखे हैं जिनकी केवल और केवल राजनीतिक महत्वाकांक्षा है । उनको ब्रह्मऋषि समाज के विकास से कुछ भी लेना देना नहीं है । इन अतिमहत्वाकांक्षी राजनीतिक लोगों में कुछ अपने आपको बाहुबली दर्शाने वाले तो कुछ अति चालाक प्रबुद्ध लोग भी हैं जो युवाओं के अंदर भरे जोश को अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए जल्दी से इस्तेमाल कर लेना चाहते हैं ताकि वो नेता बनकर अपने परिवार के लिए धनोपार्जन करने में लग जाएं ।

सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन की जरुरत

राजनीतिक और व्यक्तिगत महत्वकांक्षा वाले इन दोनों ही किस्म के लोगों की पहचान बहुत ही आसानी से की जा सकती है. हाल के दिनों में ब्रह्मऋषि समाज के गरीब लोगों को मदद पहुँचाने की सामाजिक अपील के दरम्यान इनकी गतिविधि का सूक्ष्मता से अध्ययन करने पर पता चलता है कि बात करने में तो ये लोग लंबी-लंबी करते हैं लेकिन आर्थिक मदद रुपी कृत्य में इनकी सहभागिता शून्य पाई गई है । जबकि ठीक इसके उलट युवा साथियों ने सामाजिक सहयोग के कार्य में जो जूनून दिखाया है वो काबिले तारीफ है और यह प्रमाणित करने के लिए काफी है कि समाज के इन्हीं समर्पित युवाओं को सक्रिय राजनीति में प्रवेश दिलाने हेतु पहल होना चाहिए । इसके लिए एक सामाजिक और सांस्कृतिक मंच का गठन होना चाहिए जिससे कि समाज के प्रति इमानदार व्कि सच्चे लोग राजनीति में आ सके और सांस्कृतिक संगठन उनकी मदद करे. ऐसे समर्पित युवाओं को ही सक्रिय राजनीती में प्रोत्साहन मिलने से ब्रह्मऋषिे समाज की दशा एवं दिशा दोनों बदलेगी तथा ये समाज अपने पुराने गौरवशाली इतिहास की गाथा को पुनः लिखेगा ।

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