वामपंथ की पट्टी आपने बाँध ली तो आपको उतना ही दिखाई देगा जितना आप देखना चाहते हैं. यही इनकी प्रगतिशीलता है जिसका प्रमाण ये खुद ब खुद देते रहते हैं. एनडीटीवी के एंकर रवीश कुमार(तिवारी) ऐसी ही
वामपंथी पट्टी के शिकार हैं तभी उन्हें बिहार के नवादा जिले के इंग्लिश पथरा गाँव के वोटरों पर हुआ जुलम नहीं दिखाई देता और सुधीर चौधरी के नेतृत्व वाले ज़ी न्यूज़ को दिखाई देता है. क्योंकि ज़ी न्यूज़ ने वामपंथ की पट्टी नहीं बाँध रखी है.वह खुले दिल और दिमाग से पत्रकारिता कर रहा है तो आपको उसमें अंध राष्ट्रवाद दिखता है. बहरहाल इसमें आपका दोष नहीं, अंधे को सब अंधा ही दिखता है.
वामपंथी पट्टी के शिकार हैं तभी उन्हें बिहार के नवादा जिले के इंग्लिश पथरा गाँव के वोटरों पर हुआ जुलम नहीं दिखाई देता और सुधीर चौधरी के नेतृत्व वाले ज़ी न्यूज़ को दिखाई देता है. क्योंकि ज़ी न्यूज़ ने वामपंथ की पट्टी नहीं बाँध रखी है.वह खुले दिल और दिमाग से पत्रकारिता कर रहा है तो आपको उसमें अंध राष्ट्रवाद दिखता है. बहरहाल इसमें आपका दोष नहीं, अंधे को सब अंधा ही दिखता है.
दरअसल मामला कुछ महीने पहले बिहार में हुए पंचायत चुनाव का है. इस चुनाव के दौरान इंग्लिश पथरा गाँव के लोगों को बाहुबली विधयकों के गुंडों ने वोट नहीं देने दिया. फिर पूरे गाँव में घुसकर मारपीट और लूटपाट की. लेकिन राष्ट्रीय मीडिया में ये खबर जगह नहीं पा सकी. क्योंकि इसमें दलित का कोई एंगल नहीं था.
गौरतलब है कि इंग्लिश पथरा गाँव भूमिहार बाहुल्य है, इसलिए इसमें रवीश कुमार और तमाम वामपंथी रुझान वाले चैनलों को कोई न्यूज़ एंगल नहीं दिखा.ख़ैर उन्हें दिखाने के लिए प्रगतिशील लोगों ने जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन और ट्विटर पर #NawadaJungleRaj हैशटैग भी चलाया. लेकिन इसके बावजूद खबर भू फैक्टर के कारण रवीश कुमार जैसों के प्राइम टाइम में जगह नहीं पा सकी. भूमिहारों से इतना वैमनस्य रवीश तिवारी जी…
एक अकेला चैनल ज़ी न्यूज़ ही रहा, जिसने न केवल प्रमुखता से खबर चलाया, बल्कि इंग्लिश पथरा जाकर स्थिति का जायजा भी लिया. इसलिए तो लोग कहते हैं – “ज़ी न्यूज़ जी हुजूरी नहीं करता,इसलिए इंग्लिश पथरा दिखता है रवीश बाबू”. आप भी ये पट्टी खोलो तो आपको भी दिखेगा. लेकिन जानते हैं तुमसे न होगा….



