द-लाल सलाम वालों तुमसे नहीं होगा….

 

abhay sukma

 

सी.पी.सिंह-

नाम: अभय कुमार चौधरी। अभय जब दो साल के थे, तो किसी ने इनके पिता की हत्या कर दी थी। चाचा हरिद्वार चौधरी ने इनका लालन-पालन किया। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार होने के कारण अभय की पढ़ाई बोकारो स्टील प्रबंधन की ओर से संचालित स्कूल में हुआ। पढ़ाई के दौरान ही अभय ने पीसीओ बूथ पर काम करने लगा। 2009 तक यही बूथ घर चलाने का जरिया बना। पुश्तैनी जायदाद के नाम पर अभय को सिर्फ उपनाम चौधरी मिला। किराए की झोपड़ी अभय का आशियाना था। बावजूद इसके अभय ने हार नहीं मानी।
2010 में अभय को सरकारी नौकरी लगी। घर की स्थिति जरा सुधरने लगी। मार्च 2016 में अभय की शादी हुई। इस साल अभय शादी की सालगिरह मनाने छुट्टी लेकर घर आया। 01 अप्रैल को छुट्टी काटकर वापस ड्यूटी ज्वॉइन किया। जाते वक्त अपनी माँ से वादा किया था, जल्द ही घर आउंगा। ओह, मैं तो बताना ही भूल गया अभय की मां प्राइवेट अस्पताल में नर्स है। यही दो हजार से थोड़ा मोड़ा ज्यादा पैसा मिलता है।
लेकिन आप सोंच रहे होंगे कि आज अभय का जिक्र क्यों? आखिर अभय के साथ मेरा क्या संबंध है?? अभय अब दुनिया में नहीं रहा। वैचारिक लड़ाई का दावा करने वाले दलाल सलाम के नरभक्षी से देश को बचाने की कोशिश में अभय शहीद हो गया। हां, कथित वैचारिक सिद्धांत के आतंकवादियों ने अभय की हत्या कर दी। 24 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुई नक्सली आतंकवादी हमला में अभय शहीद हुआ। वामपंथी विचार के दलालों की माने तो नक्सली समस्या के लिए विकास की असमानता जिम्मेदार है। गरीबी जिम्मेदार है। जोर-जुल्म जिम्मेदार है। सरकारी नीतियां जिम्मेदार है। कथित रूप से नक्सली न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कुछ सवाल वामपंथी विचारकों से।
abhay sukma
अभय कुमार
 1. अगर विकास की असमानता जिम्मेदार है, तो विकास कार्य को रोका क्यों जाता है?? सुकमा में हमला भी सड़क निर्माण को रोकने के लिए ही किया गया।
2. अगर गरीबी जिम्मेदार है, तो सीआरपीएफ समेत सेना व अर्द्धसेना में भी तो गरीब घर के युवा ही शामिल होते हैं। जैसा कि अभय। ऐसे में नक्सली किस गरीबी की बात करते हैं??
3. जोर-जुल्म जिम्मेदार है, तो अभय के पिता की हत्या कर दी गई थी। वह नक्सली क्यों नहीं बना???
4. सरकारी नीतियां जिम्मेदार है, तो आप अपनी नीति के साथ सामने क्यों नहीं आते? आप विकल्प क्यों नहीं बताते? यही वामपंथी राजनीतिक पार्टी की तरह ही पूंजीकरण से विरोध है, तो सिंगूर में नक्सलियों ने बंगाल की सरकार का समर्थन क्यों किया था???
5. अगर न्याय दिलाने के लिए हमला जायज है, तो शहीद जवान को न्याय कैसे मिले? क्या वामपंथी आतंकवादी न्याय दिलाने आगे आयेंगे???
जानता हूँ, इन सवालों का जवाब नहीं मिलने वाला। लेकिन, इस पोस्ट को पढ़ने के बाद एक काम जरूर करना। अभय के घर जाना उसकी माँ से बताना: आखिर कैसे दलाल सलाम वालों ने तेरी गोद उजाड़ दी! यह भी बताना कि तुम्हारे बेटे को मारने के बाद कितने गरीब लोगों को समाजिक न्याय मिला! अगर यह झूठ नहीं बोल सकते तो यह जरूर बताना कि दलाल सलाम वाले विचार की लड़ाई नहीं, बल्कि उगाही का धंधा करने के लिए ऐसा काम करते हैं। (स्रोत – फेसबुक)

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