उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव की गहमागहमी शुरू हो चुकी है.मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र भी इससे इतर नहीं. लेकिन इस क्षेत्र के इतिहास पर नज़र डालेंगे तो आश्चर्य में पड़ जाएंगे. ये एक भूमिहार बाहुल्य इलाका है लेकिन इलाके पर वर्चस्व मुसलमानों का रहा है जबकि मुस्लिम वोटरों की संख्या यहाँ भूमिहारों की तुलना में काफी कम है. फिर भी वर्ष 1985 से ये विधानसभा क्षेत्र पर अंसारी बंधुओं का कब्जा रहा है.
बीच में भूमिहार नेता कृष्णानंद राय ने चुनौती दी और चुनाव में बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई को परास्त किया.लेकिन समायवधि पूरा होने से पहले ही उनकी हत्या कर दी गयी. उसके बाद उनकी पत्नी भी सहानभूति की लहर में जीत गयी. लेकिन अगले चुनाव में अंसारी बंधुओं का उस सीट पर फिर से कब्ज़ा हो गया और भूमिहार बाहुल्य सीट के माननीय विधायक एक बार फिर से सिब्गतुल्लाह अंसारी बन गए.
सवाल उठता है कि भूमिहार बाहुल्य क्षेत्र का प्रतिनिधित्व एक मुसलमान कैसे कर रहा है? क्या मुसलमान बाहुल्य ऐसे किसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किसी भूमिहार या दूसरी जाति के प्रत्याशी को मिल सकता है? लगभग ये असंभव सी बात है. दरअसल ये भूमिहार वोटों के बिखराव का परिणाम है. मानते हैं कि मुस्लिम प्रतिनिधि के साथ दलित और यादव वोट का समीकरण काम करता है लेकिन यदि एक लाख की भूमिहार आबादी वोटों का ध्रुवीकरण करके अपना मत भूमिहार प्रत्याशी को दे तो भू-नेता को जीतने से कोई नहीं रोक सकता.
उम्मीद करते हैं कि अबकी चुनाव में अंसारी बंधुओं को भू-बंधू एकजुट होकर धूल चटायेंगे और भूमिहार बाहुल्य सीट पर भूमिहारों का वर्चस्व स्थापित होगा.
मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में कुल वोटरों की संख्या तीन लाख 68 हजार 712 है जिसमें पुरुष वोटरों की संख्या दो लाख एक हजार 980 और महिला वोटरों की संख्या एक लाख 66 हजार 725 है. जातीय आधार पार बाकी के वोटरों की एक अनुमानित संख्या कुछ इस तरह से है :
– भूमिहार वोटरों की संख्या एक लाख 25 हजार
– दलित वोटरों की संख्या 65 हजार
– यादव वोटरों की संख्या 30 हजार
– मुस्लिम वोटरों की संख्या 25 हजार
– वैश्य वोटरों की संख्या 20 हजार
– कुशवाहा वोटरों की संख्या 18 हजार
– ब्राह्मण वोटरों की संख्या 12 हजार
– क्षत्रिय वोटरों की संख्या छह हजार
– अन्य वोटरों की संख्या 50 हजार



