बिहार में वैसे तो दुतरफा कई नरसंहार हुए, लेकिन कुछ नरसंहार ऐसे हुए जिसे अबतक भुलाया नहीं जा सका. बारा नरसंहार उन्हीं में से एक है जिसमें आज से 25 साल पहले गया के बारा गांव में ‘भूमिहार’ जाति के 34 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गयी थी. इस हत्याकांड के पीछे माओवादी ग्रुप एमसीसी का हाथ था. बहरहाल हत्याकांड में कुछ लोग गिरफ्तार किये गये और मुकदमा चलता रहा. 2001 में बिहार की सेशन कोर्ट ने हत्या के आरोपी चार अभियुक्तों को मौत की सजा सुनाई जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा.उसके बाद बिहार सरकार ने माफ़ी के लिए राष्ट्रपति की अदालत में अर्जी लगायी जिसे अंततः महामहिम ने स्वीकार कर लिया और फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया.गौरतलब है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गृह मंत्रालय की सिफारिश को ठुकराते हुए नरसंहार कांड में हत्या के आरोपी कृष्णा मोची, नन्हे लाल मोची, वीर कुंवर पासवान और धर्मेंद्र सिंह उर्फ थारू सिंह को माफ़ी दी.



