जहानाबाद. सेनारी नरसंहार मामले में आज फैसले की घड़ी है. गौरतलब है कि आज से ठीक 17 साल पहले 18 मार्च 1999 की रात प्रतिबंधित एमसीसी के हथियारबंद उग्रवादियों ने सेनारी गाँव को घेर कर निहत्थे 34 किसानों की गला रेतकर हत्या कर दी थी.

इस मामले में चिंता देवी के बयान पर गांव के चौदह लोगों सहित कुल सत्तर नामजद लोगों को अभियुक्त बनाया गया था. 
सत्तर आरोपियों में से चार की मौत सुनवाई के दौरान हो चुकी है. 34 का ट्रायल पूरा हो चुका है जिनकी मामले में गिरफ्तारी हो चुकी थी.ये सभी लोग जेल के अंदर बंद हैं. 
इस नरसंहार में मुख्य गवाह चिंता देवी के पति अवध किशोर शर्मा व उनके बेटे मधुकर की भी हत्या कर दी गयी थी.चिंता देवी की तकरीबन पांच वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है. 
मामले में कुल 66लोग गवाह बने थे जिसमें से 32 ने सुनवाई के दौरान गवाही दे दी है. यह हत्याकांड उस वक्त राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री शपथ लेने के ठीक बाद हुई थी. 
अब देखने वाली बात है कि क्या फैसला आता है और उस फैसले से मारे गए 34 निहत्थे किसानों के परिवारवालों को इंसाफ मिल पाता है की नहीं?