Bihar Election and DGP Abhyanand

समाज के हित में जो काम करेगा भूमिहार–ब्राहमण समाज उसी के पक्ष में मतदान करेगा. आगामी बिहार विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर बिहार के पूर्व डीजीपी और सुपर-30 के संस्थापक श्री अभयानंद ने ये बात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के 116वी जयंती के मौक़े पर भूमिहार-ब्राह्मण समाज के मार्गदर्शक-मंडल(गवर्निंग बॉडी) की बैठक में सुझाव के तौर पर कही. इस बैठक में इस बाबत विस्तृत चर्चा हुई कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में समाज हित में क्या करना चाहिए.

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए पूर्व डीजीपी श्री अभयानंद ने कहा कि समाज ने जो मॉडल अपनाया है, मानो हमलोग किसी ख़ास राजनीतिक दल से जन्म-जन्मांतर का सम्बंध बना लिया हो, ठीक वैसे ही जैसे की साड़ी-धोती जो पत्नी पति के बीच बंधा जाता है जो कि जीवन भर का होता है यह सिद्धांत राजनीति में ग़लत है। हमलोगों को किसी दल का जीवन भर के लिए क्यों गठबंधन करना चाहिये? इसके साथ ही उन्होंने समाज की धारणा बताते  हुए कहा कि एक व्यक्ति जो बुरा है (लालू के बारे में इशारा करते हुए) इसके कारण दूसरा अच्छा (भाजपा-जदयू गठबंधन) है और आप उसी को ढोते चले यह सिद्धांत सही नही है। समाज को अपने हितों की ओर भी ध्यान देना चाहिये। उन्होंने एक दूसरा पक्ष रखते हुये भी कहा कि जो लोग यह कहते हैं कि चुकी हमारी संख्या 4% है इसलिए हमलोग कमज़ोर है, यह तथ्य सही नही है। उन्होंने कहा कि हमलोंग कोई मुख्यमंत्री बनाने के लिए जमा नही हुये है बल्कि विधानसभा चुनाव की बात कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार में कोई भी विधानसभा सीट ऐसा नही है जहाँ भूमिहार-ब्राह्मण वोटर की संख्या पाँच हज़ार से कम हो. उन्होंने एक डेटा शेयर करते हुये कहा कि 2015 में 74 ऐसे विधानसभा सीट थी जहां जीत हार का फ़ैसला 10 हज़ार से कम वोटों पर हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि हमारे 5 हज़ार वोट का मतलब 10 हज़ार वोट होता है जो किसी भी चुनावी प्रत्याशी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है और इसलिए भूमिहार-ब्राह्मण वोटर को कम आंकने की गलती कोई न करे। इसलिए अबकी होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में भूमिहार ब्राह्मण समाज को उसी को अपना मत देना चाहिये जो इस समाज के हित में ये काम करे. भूमिहार ब्राहमण समाज ये बात बंद कमरे में या दबी-छुपी जबान में नहीं, बल्कि डंके की चोट पर कहना चाहिये. राजनीतिक दलों के साथ बंद कमरों में परिवार हित के लिए समाज हित को दांव पर लगाने वालों के दिन अब लद गए इसलिये सभी सीट पर कंडिडेट से बात की जाय और जो भी बात हो वह सब खुले में हो और सबों के बीच चर्चा से तय हो।

उन्होंने कहा कि हमलोग राज्य-स्तर पर किसी दल को वोट देने के सम्बंध में राय बना लेते हैं और यही सबसे बड़ी भूल है. इसकी जगह पर भूमिहार-ब्राह्मण समाज को हरेक विधानसभा सीट के लिए ऐसे प्रत्याशियों का चुनाव करना चाहिए जो हमारे समाज की समस्याओं के काम आ सके. यह प्रत्याशी किसी भी जाति या धर्म का हो सकता. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए समाज के लोग किसी नेता के भाषण सुनने या माला पहनाने या नारा लगाने नही जायेंगे. प्रत्याशी स्वयं आगे आएं और बताएं कि समाज की समस्याओं का उनके पास क्या समाधान है? अपने गाँव का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उनके गाँव के सभी भूमिहार वोट एक यादव प्रत्याशी को दिया गया और उस यादव ने चुनाव जीतने के बाद कैसे गाँव के विकास के लिए काम किया. उन्होंने कहा कि आज उनके गाँव के खेत के सभी मौजें तक सड़क जाती है जहाँ पहले पैदल जाना पड़ता था. आज भी उनके गाँव में कुछ होता है तो वह विधायक मदद के लिए सबसे पहले दौड़ कर आता है क्योंकि वह जानता है कि इस गाँव का एकमुश्त वोट उसे मिला है। वह हमारे गाँव के लोगों का फ़ाइल लेकर ख़ुद से लेकर दौड़ता है। समाज को इस बार खुलकर अपनी बात रखनी होगी और हरेक कंडिडेट को मौक़ा देना होगा. जो हमारी शर्तों को पूरा करे उसके साथ अपना १०० प्रतिशत वोट देना चाहिये।

भूमंत्र फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस चर्चा का शुभारम्भ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्री अभिषेक शर्मा ने शांति मंत्र के उच्चारण के साथ किया. पत्रकार डा. देव कुमार पुखराज ने चर्चा की शुरुआती भूमिका बांधते हुए कहा कि पिछले 40-50 सालों में जो भूमिहार-ब्राह्मण समाज ने विभिन्न राजनीतिक प्रयोग के मॉडल जैसे कि एक गठबंधन का विरोध, एक पार्टीएक गठबंधन के साथ एकमुश्त खड़ा होना, स्वजातीय कैंडिडेट को समर्थन करना, अपराधी-बाहुबली को सामाजिक सुरक्षा के नाम पर आगे बढ़ाना एवं जातीय संगठन के नाम पर उसके चेहरे को आगे बढ़ाना आदि रहा है। लेकिन भूमिहार-ब्राह्मण समाज के इन प्रयोगों से समाज को कुछ मिलना तो दूर अपने बहन बेटियों की इज़्ज़त तक बचाना मुश्किल हो रहा है. पिछले 30 सालों में इस समाज को राजनीति से सिर्फ़ नुक़सान ही हुआ है और हमलोग लगातार कमज़ोर किये गये हैं। लेकिन अब वक़्त समझदारी से बदलाव लाने का है. इस चर्चा में अलग-अलग क्षेत्रों के कुल 16 प्रबुद्धजनों ने हिस्सा लिया और अपनी बात रखी जिनके नाम इस प्रकार से है –

  1. श्री अभयानंद जी (पूर्व डीजीपी एवं संस्थापक, सुपर-30)
  2. कर्नल (रिटा) श्री ए के सिंह (संस्थापक, रुबन हॉस्पिटल समूह)
  3. श्री अरबिंद सिंह( शिक्षा-विद, दिल्ली)
  4. डा श्री देव कुमार पुखराज( वरिष्ठ पत्रकार)
  5. डा मनीष कुमार (प्रसिद्ध न्यूरो-सर्जन, अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली)
  6. श्री अदिति नंदन( फ़ाउंडर अमात्य मीडिया, पटना)
  7. कर्नल(रिटा) श्री मुक्तेश्वर प्रसाद( पूर्व सेना अधिकारी एवं शिक्षा-विद)
  8. श्री सुधीर प्रधान(समाज सेवी)
  9. कृषि रत्न श्री अभिषेक कुमार
  10. कर्नल(रिटा) श्री विद्या शर्मा(पूर्व सेना अधिकारी एवं विरासत विज्ञानी)
  11. श्रीमती इंदिरा राय (अध्यक्षा, ब्रह्मर्शी सेवा संस्थान, हैदराबाद)
  12. श्री निर्मल कुमार ( फ़ाउंडर एंड MD निर्मल ग्रूप G-Auto)
  13. श्री कुणाल सिन्हा(वाईस प्रेजिडेंट, विप्रो)
  14. श्री प्रशांत कश्यप (ब्रांड एंड स्ट्रैटेजी, जागरण ग्रूप)
  15. श्री अभिषेक शर्मा (अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट)
  16. श्री गोपाल जी राय (सहायक निर्देशक, DAVP भारत सरकार)

 

22 COMMENTS

  1. बिल्कुल व्यावहारिक और प्रगतिशील बात कही है अभयानंद सर ने।

  2. इस मामले पर श्री अभयानंद जी और मेरा विचार विमर्श पहले ही हो चुका है। मैं इसका पूर्ण रूपेण समर्थन करता हूं। मैंने अपने विचार के साथ इसे फेसबुक पर भी पोस्ट किया है।

  3. Abhayanand Sir ka social development technology is better for election 2020 ” who work for us ,we vote for him”.

  4. बहुत अच्छी सोच है, लेकिन इसको अमलीजामा पहनना मुश्किल है कारण इस समाज का कोई सर्वमान्य नेता नही है,जो है,वे अपने परिवार से आगे कुछ भी सोचने वाले नही है। इस समाज को कुछ बहुमुखी प्रतिभा के धनी निस्वार्थ लोगो के नेतृत्व की जरूरत है।श्री अभया नंद जी अगर कुछ समय दे,तो आगे का रास्ता साफ हो सकता है। मैं इस कार्य मे अपने विधान परिषद चुनाव(22 अक्टूबर)के बाद समय दूंगा।

  5. समाज आहत है, बीजेपी जद यू मे भी टिकट के मामले मे कहीं नहीं है, बीजेपी राष्ट्रीय संगठन से भी आज गायब हो गये, हमे एक जुट हो कर कड़े निर्णय लेने होंगे – अरविन्द कुमार, प्रबक्ता, बीजेपी बिहार

  6. बिल्कुल सही और सटीक सुझाव है।राजनीति का मंडलीकरण ने देश और समाज का बड़ा नुकसान किया है।हमारी वाजिब मांग को भी साम्प्रदयिक और सामंती कहकर हाशिये पर धकेल दिया गया और उनकी घोर जातिवादी राजनीति सामाजिक न्याय का पर्याय बन गयी।
    सामाजिक परिवर्तन और विकास धीमी और क्रमबद्ध प्रक्रिया होती है।90 के दशक की राजनीति ने उसका आधार ही बदल डाला है।श्री बाबू के समय मे अग्रणी राज्यों में सुमार बिहार बदहाली,पिछड़ापन और जंगलराज का पर्याय बना दिया गया था।
    डिजिटल युग और राजनीति के बदलते मुहावरों से एक नई राजनीतिक चेतना पैदा हुई है और महत्वपूर्ण और निर्णायक अवसर भी सामने दिख रहा है।ऐसे में एकजुट होकर एक मुश्त वोट करना समाज और समय की मांग है।

  7. अच्छा प्रयास,भू समाज कृषि और शिक्षा पर जोर दे।नीति निर्माताओं पर प्रभावकारी दबाव डाले, शुभकामनाएं।

  8. Ews जिसमे 2-3 नम्बर फायदा मिलते है Neet exam .लेकीन जाती देखकर CO sign नही करते है। दलाल 1500 लेकर करवा देता है।यह भुगता हुआ कहानी है
    Retired engineer
    A.m.sharma
    Patna

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