Bhumihar Politics

आज भी हम भूमिहार -ब्राह्मण सभी क्षेत्रों में अग्रणी है। उद्योग, व्यवसाय,शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बौद्धिक क्षमता आदि सभी क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका में आज भी है। बेशक कुछ लोग पिछङ गये है। अगर समाज का एक सक्षम व्यक्ति एक व्यक्ति को व्यवस्थित कर दे तो फिर हमारे समाज से बेरोजगारी पुर्णतः समाप्त हो जायेगी। वैसे मेरी व्यक्तिगत भूमिका तो ऐसी होती है। लेकिन समाज के सभी स्तर के लोगों को ऐसी भूमिका में आना चाहिए। मेरी भरसक कोशिश होती है कि मेरे जरूरत का एक एक समान समाज के व्यक्ति के द्वारा किये जा रहे व्यवसाय से ही आये। मसलन मैं पान भी हमने समाज के एक व्यक्ति के द्वारा चलाये जा रहे दुकान से ही खाता हूँ। लेकिन जहाँ मजबूरी होती है, वहाँ दुसरे समाज से लिया जाता है। समय बहुत ही खराब चल रहा है।

सभी समाज के लोगों को हमारे समाज से एक अंदरूनी जलन है। यह जलन स्वभाविक रूप से उत्पन्न नही है। इस तरह का जलन दुसरे समाज के नेतानुमा लोगों के द्वारा स्वयं को राजनैतिक रूप से स्थापित करने के कारण दिमाग में भर दिया गया है। इसे धरातल पर बदलने के लिए हमें अपने भी आचार विचार में परिवर्तन लाना होगा। हम आपस में भी एक दुसरे से जलन रखते है। एक सबसे बङी कमजोरी है कि चाहे किसी क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति हो, राजनीति में स्वयं को आजमाने का कोशिश करने लगता है।

मुंबई, दिल्ली, भोपाल, अहमदाबाद कही भी किसी अन्य काम में सफल होने के बाद अपने गृह क्षेत्र में चुनाव के वक्त पहुंचकर गंध फैलाकर पूनः अपने पेशा में लौट जाना एक भयंकर बीमारी है। जबकि पूर्व से राजनैतिक पेशा में स्थापित लोगों का मदद करना उनकी मुख्य भूमिका होनी चाहिए।

लेखक, व्यवसायी, उद्योगपति सबका सब राजनीति में आना चाहता है। आजकल तो एक अजीब विडंबना देखने को मिल रहा है कि फेसबुक पर अटर पटर लिखकर बिना मतलब किसी अन्य समाज से टकराना एक फैशन जैसा हो गया है। एससी/ एसटी एक्ट का मामला हो या हिंदु मुस्लिम का सबसे पहले हमारे समाज का नौजवान ही कूद-फाँद  शुरू कर देता है जबकि एससी/एसटी में

Sanjay Choudhary,
          श्री संजय चौधरी

सर्वाधिक रूप से यादव ही पीडित है। लेकिन दर्द सर्वाधिक हमको होने लगता है।सबसे बङा हिंदु होने का ठेका भी हम ही ले लेते है। यह सब कुछ कारण है जिसके चलते भी हम अन्य समाज से अलग होते जा रहे है। एक घटना चार पांच साल पहले मेरे बगल के गाँव में घटी थी। एक सभ्रांत हमारे समाज के व्यक्ति के आम के बगीचे में चोरी हो गयी। उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराया। पुलिस ने अनुसंधान कर चोर को पकङकर जेल भेज दिया। संयोगवश वह चोर जेल में दो चार दिन बाद मर गया। अब उस चोर के स्वजातियों ने भीङ इकट्ठा कर प्राथमिकी दर्ज कराने वाले के घर हमला कर दिया। लूटपाट कर एक व्यक्ति को बेरहमी से पीटा भी। पुलिस भी पिटाई खाने वाले को ही गिरफ्तार कर थाना में भेज दी।शाम को जब मुझे यह सुचना मिली तो मैंने डीएसपी साहब से उसके पढने वाले विद्यालय का नाम पूछा और उसको स्थापित करने वाले व्यक्ति का नाम। फिर मैने उनसे यह भी पूछा कि क्या हमारे पूर्वजों ने समाज को इसलिए ही शिक्षित करने के लिए वह स्कूल खोला था कि आप जैसे लोग हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित विद्यालयों में पढकर हम ही निर्दोष लोगों पर जुल्म करे। डीएसपी साहब अभी एसपी है, उन्होंने स्वीकार किया कि भीङतंत्र के सामने कुछ गलत भी करना पङ जाता है। कहने का आशय यह है कि हम लङने भीङने के लिए तो धरती पर आये नही है। हम तो धरती पर इसलिए आये है कि अपने अक्ल का बेहतर उपयोग करके अपने समाज को बेहतर तैयार कर दुसरे समाज के बेहतरी के लिए भी कार्य करे।

हमारे पूर्वजों के सोच के व्यापकता को गौर करे। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतरी के लिए कितना बङा व्यापक काम किये थे। मेरे घर मुजफ्फरपुर जिला में है, यहाँ तो मैं देख रहा हूँ कि जिला के अंदर सभी उच्च विद्यालय और सभी महाविद्यालय (एकाध को छोङकर) मेरे ही समाज के द्वारा स्थापित ह। कमोवेश सभी जगहों की स्थिति यही है, जहाँ भी हमारी आबादी है। आगे बढे और जिस क्षेत्र में है, आगे बढते रहे। साथ ही साथ कुछ पीछे छुट गये लोगों को भी आगे बढ़ाये। आपसी टांग खिचौवल से दूर होकर समाज के बेहतरी के लिए अपना सर्वोत्तम देने की कोशिश करते रहे।

लेखक परिचय: श्री संजय चौधरी
जीतवारा, कटरा
मुजफ्फरपुर

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