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मोकामा. न्याय की जब उम्मीद न हो तो आन्दोलन ही आखिरी रास्ता बचता है. बिहार भी उसी रास्ते पर धीरे-धीरे चलता दिखाई दे रहा है. राज्य में अब ऐसा लगने लगा है कि सरकार नाम की कोई संस्था रह ही नहीं गयी है. सरकारी संरक्षण में अपराध अपने चरम पर है. अभी कुछ दिनों पहले सत्ता के हनक में चार किसानों को नेता टाइप के अपराधी ने सरेआम गोली मार दी थी और प्रशासन मूकदर्शक बनकर मामले को दबाने में जुटा था. उस वक़्त पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार ने वहां पहुंचकर उन्हें बेनकाब किया था और पीड़ितों की आवाज़ को बुलंद किया था. अब मोकामा में उससे भी जघन्य घटना घटी है जिसमें शिवानी नाम की 9वीं की छात्रा को घर में घुसकर ज़िंदा जला दिया गया. इतने जघन्य अपराध के बावजूद स्थानीय पुलिस इस मामले को ढंकने – छिपाने का प्रयास कर रहा है और उलटे मृत किशोरी के परिजनों को ही फंसाने में लगी हुई है. पूरे घटनाक्रम के बारे में जानने और परिवार को सांत्वना देने के लिए कोरोना संक्रमण की परवाह न करते हुए डॉ. अरुण कुमार आज मोकामा पहुंचे और इस हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि इस मामले का स्पीडी ट्रायल होना चाहिए और एक महीने के अंदर रिपोर्ट देनी चाहिए. यदि ऐसा नही किया तो फिर आन्दोलन किया जाएगा. सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा –

मोकामा के महेन्द्रपुर में मृतक शिवानी के परिजनों से घटना की जानकारी प्राप्त की हमारी पूरी संवेदना इस परिवार के साथ है । इस हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते । ~ डॉ. अरुण कुमार ~

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डॉ. अरुण कुमार द्वारा दिए गए वक्तव्य का वीडियो –

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