जनतांत्रिक विकास पार्टी (जविपा) के अध्यक्ष अनिल कुमार ने कोरोनावायरस को लेकर राज्य सरकार द्वारा सरकारी व निजी स्कूलों तथा कॉलेज व कोचिंग संस्थानों को 31 मार्च तक बंद करने के फैसले पर ऐतराज जताया। उन्होंने सरकार के इस फैसले को दहशत फैलाने वाला फैसला बताया। पटना में सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में जविपा नेता ने कहा कि एहतियात के तौर पर सूबे के सभी महत्वपूर्ण संस्थानों को बंद करने का फैसला समझ से परे है, जबकि इससे बचाव के लिए न तो प्रदेश का कोई अस्पताल तैयार है और न ही प्रदेश में बाहर से आने वाले लोगों की रेलवे, हवाईअड्डे और बसअड्डे पर स्क्रीनिंग ठीक से हो रही है।

उन्होंने कहा, “कोरोना से बचने के लिए सबसे पहले अस्पतालों में इसकी व्यवस्था करनी थी, लेकिन सरकार की घोषणा के बाद पीएमसीएच में डॉक्टरों की व्यवस्था तक ठीक ढंग से नहीं की गई है। आज डॉक्टरों और मरीजों में हाथापाई की नौबत आ रही है।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कोरोना से बचाव के लिए सबसे पहले अस्पतालों में वार्ड बनाना चाहिए था और समुचित व्यवस्था करनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा, “प्रदेश में कोरोना से बचाव के लिए मास्क और सेनेटाइजर नहीं मिल रहे है। अस्पताल तो छोड़िए, अगर आप अपने पैसे से भी ये चीजें खरीदना चाहें, तो मिलना मुश्किल है।”

उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था पहले से खस्ताहाल है और अब इस तरह के फैसले से नीतीश कुमार क्या साबित करना चाहते हैं?

अनिल कुमार ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा, “कोरोनावायरस बाहर से फैल रहा है, इसके लिए प्रदेश के रेलवे स्टेशनों, बसअड्डों और हवाईअड्डे पर स्क्रीनिंग सेंटर होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि सरकार कोरोना के नाम पर ‘बंदी’ कर अपना पीठ खुद थपथपाने का काम किया है, जो बिलकुल गलत है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि आज प्रदेश का एक भी अस्पताल ऐसा नहीं है, जहां इसकी पूरी तरह से जांच हो सके। (Agency)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here