Skip to main content

Posts

Showing posts from May, 2018

हैबसपुर नरसंहार में सभी आरोपी बरी, सकते में लाल सलाम, रणवीर सेना पर लगा था आरोप

पटना. हैबसपुर नरसंहार कांड के 28 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में आज बरी कर दिया गया. लगभग बीस वर्ष पूर्व हुए इस बहुचर्चित मामले में एससी एसटी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने स्पीडी ट्रायल करते हुए आज ये फैसला दिया. घटना 23 मार्च 1997 को रनिया तालाब थाना क्षेत्र में हुई थी जिसमें 10 दलितों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. विशेष कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए कांड के आरोपितों रामायण तिवारी, शिवानंद शर्मा, नवल सिंह, भूतल सरदार, गजेन्द्र सिंह उर्फ महेश्वरी समेत 28 आरोपितों को नरसंहार कांड से बरी कर दिया। यूनीवार्ता की रिपोर्ट के मुताबिक़ मार्क्सवादी पार्टी - माले ने फैसले को निराशाजनक बताया है. हैबसपुर नरसंहार कांड पर एक नज़र -

राघोपुर कांड के प्रतिशोध में दिया था घटना को अंजाम : हैबसपुर कांड से कुछ दिन पूर्व जिले के ही राघोपुर में ऊंची जाति के 6 लोगों की हत्या कर दी गई थी थी। माना जाता है कि इसी के प्रतिशोध में रणवीर सेना ने हैबसपुर की घटना को अंजाम दिया था। घटना में करीब मांझी, सुरेश मांझी, किशुन मांझी, भोपाली मांझी, शकुनी मांझी, राजकुमार मांझी समेत 10 दल…

भूमंत्र यानि भूमिहारों के लिए संजीवनी - 'राजीव कुमार'

भूमिहार ब्राम्हणों के भारत के सबसे बड़े सामाजिक मंच भूमंत्र ग्रुप (www.bhumantra.com ) की दिन ब दिन बढ़ती उपयोगिता एवं विश्वसनीयता तथा इस मंच पर मौजूद भूमिहार समाज के सच्चे पुरोधाओं के असीम योगदान पर प्रकाश डाल रहे हैं ब्रह्मऋषि चिंतक एवं विचारक " राजीव कुमार " 
संजीवनी बूटी एक ऐसी प्राणरक्षक बूटी थी जिसे सुषेण वैद्य जी ने लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा हेतु हनुमान जी को पर्वत पर से लाने को कहा था और फिर उस संजीवनी बूटी को पीसकर लगभग मृतप्राय हो चुके लक्ष्मण जी को पिलाकर उनके प्राणों की रक्षा की थी । आज के आधुनिक युग में भू - मन्त्र नामक सोशल मीडिया मंच सुषुप्तावस्था में जाकर लगभग मृतप्राय होने की ओर अग्रसर भूमिहार ब्राम्हण समाज के लिए संजीवनी का कार्य कर रहा है और ईस समाज में अतिरिक्त ऊर्जा का संचार कर उसके प्राण में जान फूँक रहा है । पिछले एक -डेढ़ वर्षों में जिस तरह से भूमिहार समाज के एक से बढ़कर एक समाज सेवियों एवं सच्चे पुरोधाओं ने भूमंत्र के माध्यम से अपने भूमिहार ब्राम्हण समाज की सेवा की वो अतुलनीय है एवं एकतरह से संजीवनी की तरह कार्य कर रहा है । चाहे रोजी रोजगार से सम्बं…

भूमिहार समाज की दोहरी लड़ाई

" भूमिहार समाज दोहरी लड़ाई लड़ रहा है एक बाहरी शक्तियों से तो दूसरी अपने ही समाज के अंदर बैठे राजनैतिक रावणों ( दलालों ) से "  हालिया सामाजिक गतिविधियों एवं व्यक्तिगत शोध पर आधारित ब्रह्मऋषि चिंतक एवं विचारक "राजीव कुमार " की प्रस्तुति : - 
खल मंडली बसहु दिनु राती। सखा धरम निबहइ केहि भाँती॥  मैं जानउँ तुम्हारि सब रीती। अति नय निपुन न भाव अनीती॥  भावार्थ:-दिन-रात दुष्टों की मंडली में बसते हो। (ऐसी दशा में) हे सखे! तुम्हारा धर्म किस प्रकार निभता है? मैं तुम्हारी सब रीति (आचार-व्यवहार) जानता हूँ। तुम अत्यंत नीतिनिपुण हो, तुम्हें अनीति नहीं सुहाती॥ 
बरु भल बास नरक कर ताता। दुष्ट संग जनि देइ बिधाता॥  अब पद देखि कुसल रघुराया। जौं तुम्ह कीन्हि जानि जन दाया॥  भावार्थ:-हे तात! नरक में रहना वरन्‌ अच्छा है, परंतु विधाता दुष्ट का संग (कभी) न दे। (विभीषणजी ने कहा-) हे रघुनाथजी! अब आपके चरणों का दर्शन कर कुशल से हूँ, जो आपने अपना सेवक जानकर मुझ पर दया की है॥ 
उपरोक्त पंक्तियाँ तुलसीदास रचित रामायण से उद्धरित की गई हैं । ये पंक्तियाँ अक्षरसः आज के भूमिहार ब्राम्हण समाज के परि…