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भूमिहार समाज को आगे बढ़ाना है तो भूमिहारत्व को प्राथमिकता देनी होगी


अभिनव कुमार सिंह -

समाज के लोगों में इतनी दुबिधा क्यों है ? कभी वो कट्टर राष्ट्रभक्त बन जाते है कभी धर्मरक्षक के रूप में सामने आने लगते है पर अपने मूल समस्या और समाज आगे कैसे बढ़े अपनी हिस्सेदारी कैसे बढ़े उस पर कोई चर्चा ही नही हो पाता है बाकी कसर पार्टियों में बट कर कर देते है शायद ऐसी सोच ही हमारे समाज को आगे नही बढ़ने देता है  । 

याद रखे अगर हम राष्ट्र प्रथम करंगे हिन्दू प्रथम करंगे तो जाति का बात करना ही मूर्खता है अगर हमें समाज को आगे बढाना है तो समाज को प्रथम रखना होगा , सोचना होगा कि क्या दूसरे समाज वाले कभी किसी समस्या पर हमारी मदद किए थे या है तो हम सबको साथ लेकर क्यों चले ? इससे हम कितना आगे बढ़ सकते है सबको साथ लेकर चलने में । 

90 दसक में सिर्फ हमारी ही जाति पिछड़े दबे कुचलो के बीच में क्यों खलनायक की तरह प्रस्तुत किया गया बाकी जातीय मलाई भी खाया और आगे भी बढ़ा पर हमलोग हर तरह से नुकसन ही नुकसान उठाए  । सोचे जरूर की क्या पहले जरूरत है आज के परस्थिति में ... निष्न्देह हमलोग धर्म को भी आगे रखते है और राष्ट्र को भी पर आज हमारे समाज को जरूरत सबसे ज्यादा किसका है ? कुछ लोगों को मेरा पोस्ट कड़वा लगेगा पर सच यही है कि अगर राष्ट्रवादी बने तो जाति को खो देंगे और अगर जाति को आगे बढ़ा देंगे तो सभी कुछ हासिल कर के सुंदर राष्ट्र का भी निर्माण कर देंगे क्योंकि प्रसासनिक छमता हम लोगो के खून और स्वभाव में है इस वजह से वैचारिक भिन्नता भी नजर आता है पर सोच एक है हमारा सम्ब्रिधि समाज और सुंदर राष्ट्र का ।

Comments

Mauli bhardwaj said…
Sab bhumihar ek hokar bhumihar candidate ko mahaj ek vote to de hi nahi paate hai jisme unka koi paisa kharch nahi hota to phir hum ye kaise soch sakte hai ki ek bhumihar dusre bhumihar ko dhan bal aur bahubal se sahayta karenge,ek to hamari population itni kam uper se dusri jati k mukable sabse jyada aapsi matvedh,ek english kahawat hai people always wants to see one leader lakin hamare samaj me sab apne aap ko leader samajhta hai sayad isliye kyoki ham dusre caste k mukable jyada shikchit hona bhi hamare samaj k liye gunah saabit ho raha hai sayad hamare purwaj hamare jaise nahi thhe jo itne dino tak raj kiya hamko aaj dusre jati se samajik aur rajnetik ekta sikhne ki jarurat hai jiska eg.yadav jati hai jo hamse bahut kam shikchit hai

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