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याचक और अयाचक ब्राह्मणों के मतभेद की वजह से राजनीतिक रूप से हाशिये पर जा रहे हैं ब्राह्मण


अरविंद रॉय-
ब्राह्मणों में आज भी दो वर्ग बने हुए हैं- एक याचक तथा दूसरा अयाचक। दोनों में ताल-मेल का सर्वथा अभाव है। 

ब्राह्मणों ने देश व समाज को लूटा है,मैं ऐसे लोगों से जानना चाहता हूँ कि काशी नरेश पंडित विभूति नारायण सिंह, महारानी चेन्नमा,मंगल पांडे,बाल गंगाधर तिलक, वीर सावरकर,चन्द्र शेखर आज़ाद,महारानी लक्ष्मी बाई,रामप्रसाद बिस्मिल,चाणक्य, पंडित मदन मोहन मालवीयआदिने क्या लूट की थी?भगवान परशुरामजी ने सहस्रबाहु जैसे आतातायी राजाओं से पृथ्वी को आज़ाद कराकर क्या लूट की थी? सच तो यह है कि मनगढ़ंत कथनों के सहारे ब्राह्मणों की अस्मिता एवं स्वाभिमान पर आए दिन कुठाराघात करते रहतेहैं।
 
आज अगर हम देखें तो धार्मिक स्तर हो या सामाजिक या फिर राजनैतिक हर स्तर पर ब्राह्मणों की अस्मिता को नष्ट करने का कुचक्र रचा जा रहा है। ब्राह्मणों के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इतना सब होने के बावजूद ब्राह्मण मौन है।
 
ब्राह्मणों द्वारा स्वाभिमान एवं अस्मिता पर घातक चोट करने वालों का प्रतिकार न किया जाना जहां धृष्ट लोगों को प्रोत्साहित कर रहा है,वहीं इससे किसी न किसी स्तर पर ब्राह्मणों की कमजोरी भी उजागर हो रही है। पूरे समाज को दिशा देने वाला ब्राह्मण आज स्वयं दिशाहीनलग रहा है। ब्राह्मणों की व्यसनों में बढ़ती संलिप्तता ब्राह्मण समाज ही नहीं अपितु पूरे सामाजिक परिवेश के लिए गंभीर एवं चिंताजनक बात है।
 
अगर संगठनात्मक दृष्टि से देखा जाय तो समूचा ब्राह्मण समाज बिखरा पड़ा है। राष्ट्रीय स्तर पर आज लगभग 40- 50 ब्राह्मण संगठन बने हुए हैं, लेकिन ‘अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग’ तथा आम ब्राह्मणों तक इन संगठनों की पहुँच के अभाव के चलते सभी ब्राह्मण संगठन निष्प्रभावी हो चुके हैं। इन संगठनों के पदाधिकारियों में जहां ‘मैं और मेरा’ की भावना घर कर चुकी है, वहीं ‘मैं श्रेष्ठ हूँ और दूसरा निकृष्ट’ का भाव भी ब्राह्मणों में व्याप्त है। ब्राह्मणों में आज भी दो वर्ग बने हुए हैं- एक याचक तथा दूसरा अयाचक। दोनों में ताल-मेल का सर्वथा अभाव है। ब्राह्मण संगठनों में भाषावाद, क्षेत्रवाद तथा प्रांतवाद लकड़ी में लगे दीमक की तरह कार्य कर रहा है। आपसी द्वेष एवं प्रतिद्वंदता के चलते ब्राह्मण समाज प्रगति करने की बजाय गर्त में चला जारहा है। जम्मू-कश्मीर में ब्राह्मणों पर हो रहे अत्याचारों को इसी परिदृश्य में देखा जा सकता है। आपसी प्रतिद्वंदता ने ब्राह्मण समाज को उस बीमार व्यक्ति के समान बना दिया है जो जीवन की आस छोड़ चुका है। आपसी प्रतिद्वंदता का ही नतीजा है कि देश की संसद से लेकर प्रदेशों की विधान सभाओं,विधान परिषदों तथा विभिन्न निकायों में नाम मात्र के ब्राह्मण प्रतिनिधि रह गए हैं।

आज जो हालात ब्राह्मण समाज के हैं उन हालात में ब्राह्मण समाज के स्वाभिमान एवं अस्मिता की रक्षा करना असंभव है। आज ज़रूरी है कि समूचा ब्राह्मण समाज आपसी प्रतिद्वंदता,‘मैं और मेरा’,‘मैं श्रेष्ठ दूसरा निकृष्ट’के साथ-साथ क्षेत्र वाद,भाषावाद, प्रांतवाद एवं दुर्व्यसनों को त्याग कर एकजुट हों। जब तक ऐसा नहीं किया जाएगा तब तक ब्राह्मण समाज अपना पुराना गौरव हासिल नहीं कर सकेगा। तथा ब्राह्मण समाज की अस्मिता तथा स्वाभिमान पर आक्रमण होता रहेगा।

Comments

Mauli bhardwaj said…
agar yachak aur ayachak brahman ek ho jaye to na bihar aur up me yadavo ki rajneeti khatm ho jayagi aur sirf bihar aur up me hi nahi desh bhar me brahman phir se satta pe honge,jab tak congress bihar up me 1990 tak satta me thi brahmano aur bhumiharo ko yani yachak aur ayachak brahaman ek thhe aur raj ker rahe thhe per aaj inhe koi pucchne wala nahi hai.

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