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प्राचीन परशुराम मंदिर की दुर्दशा, शरत राय की आंखों देखी


शरत राय -

महर्षि जमदग्नि ऋषि के नाम पर स्थापित " जमानियां " जिला गाजीपुर, बाबा परशुराम की जन्म भूमि और हरपुर मंदिर के अन्दर भगवान परशुराम की वह प्रतिमा जिसकी  प्राण प्रतिष्ठा आज से ढाई सौ वर्ष पूर्व सकलडीहा कोट के तत्कालीन राजा  वत्स सिंह  ने पूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के साथ की थी ।
       
इस बात की जानकारी मुझे हाल ही में हुई कि मेरे गृहजनपद में भगवान परशुराम जी का मंदिर ही नही अपितु जन्म स्थल भी है । 
        
बस तभी से बेचैनी थी बाबा के दर्शन को और जल्द ही बाबा ने बुला भी लिया । 

लगभग 2 घण्टे बिताए हमने मंदिर में , वहां की दशा देखकर मुझे बहुत अफसोस हुआ कि कहने को तो देश मे भूमिहार समाज या बाबा के नाम पर तमाम संस्थाए , सङ्गठन और समाजिक समिति बनी हुई है , तमाम अध्यक्ष और फलाना पदाधिकारी बनकर समाज के ठीकेदार बने बैठे है जिनमे की कुछ ने अब राजनीतिक आधार पर प्रमाण पत्र बांटना भी शुरू कर दिया है ।

 दिल्ली , बम्बई , बंगलोर , कलकत्ता , बिहार , गुजरात मतलब की राज्य छोड़िये हर शहर का अलग अलग भूमिहार सङ्गठन है जो किसी न किसी राजजीतिक मामलों में समर्पित है और सबका नारा " जय परशुराम " लेकिन धरातल पर वास्तविकता क्या है ? तो नगण्य

सङ्गठन पंजीकृत कराने से कुछ नही होता साहब , 
सङ्गठन में कार्य भी होना चाहिए 

हर हर महादेव

जय श्री परशुराम
@fb

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