Skip to main content

गांवों में छुपी है भूमिहार समाज के विकास की कुंजी


जीतेंद्र मिश्रा-
भूमिहार क्या है? इस पर अधिक जानकारी हमें नहीं है।वही इतना अवश्य समझते हैं।भूमिहार को गाँव एवं जमीन से गहरा संबंध है।वही दोनों उपेक्षित है तो भूमिहार समुदाय को उपेक्षित होना कोई आश्चर्य नहीं है।जब तक आपके द्वारा जमीन एवं गाँव की उपेक्षा होती रहेगी।तब तक आपकी भी उपेक्षा होती रहेगी।
आप कितना भी बड़ा पद हासिल कर लीजिये।कितना भी बड़ा कोठी बना लीजिये।लेकिन यदि आपका गाँव आपका जमीन उपेक्षित है।तो आपको दिन में एक बार शर्मिंदा किसी न किसी के नजदीक होना होगा। इसलिये हमलोगों का प्रयास होना चाहिए।ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा का केंद्र बिंदु बनाया जाय वही प्रयास किया जाय जिन जिन पंचायतों में मुखिया सरपंच जो भी जनप्रतिनिधि भूमिहार समाज से है। उनको जोड़ा जाए। वही उनके द्वारा किया गया विकास कार्य पर आलोचना एवं सराहना किया जाय।यदि कोई ऐसा पंचायत या गाँव जहाँ का जनप्रतिनिधि भूमिहार है।वहाँ अच्छी विकास कार्य हुआ है।उसको प्रचारित किया जाय जिससे और भी जगह लोगों में जागरूकता आएगी।
आप यकीन मानिए भूमिहार समाज का सार्वजनिक विकास तभी हो पायेगा। जब गाँव एवं जमीन का विकास होगा। ग्रामीण विकास ही संपूर्ण विकास का पैमाना है।जिसको गुलजार करने की छमता केवल भूमिहार में है।

Comments

Mauli bhardwaj said…
Sahrikaran ka daur prbti per hai aur ham bhumihar apne village ko waha k jameen ko chhor sahar ki aur prasthan ker rahe hai chahe shiksha ko lekar chahe paise ko lekar to kabhi kish aur kaarno se aur apne purwajo ki sampatti ko jameen jattha per dhayan nahi de paa rahe hai aur hamari jameen per kabja jaise baat dhere dhere samne aa rahi hai jo sharmnaak hai aap shiksha ko lekar baahar jarur jaye lakin apne gaon se apna connection na khatm kare,agar aap apna jameen bechna chahte hai to apna jameen kosish kare apne jati ko hi de aur sahi kemat le apne jameen ki aur kam kimat me naa hataye apni jameen,dikhwae pe kharch na kare,fijool kharchi na kare kam se kam mahina me ek baar apne gaon jarur jaye aur apni achal sampatti pe dhayan de jahan tak shambhav ho sake aur jis gaon me bhumihar population kam hai waha k bhumihar ko khas taur pe alert rahne aur apne sampatti pe dhayan dene aur uss gaon ke samaj se milker rahne ki jarurat hai jahan tak ho sake apna kharch karke bhi uss samaj k sath rahe
Mauli bhardwaj said…
Agar aap gaon ko chhorker baaher jaate hai to iss baat ka dhayan rakna hoga ki apka koi apna aisa gaon me rahta hai jo aapke sampatti pe dhayan de sake wo koi bhi ho sakte hai apke gurdian dada dadi apke chacha ya apke relation kyoki yah bahut jaruri hai,agar aap gaon se baahar jaaker mera matlab bade shahro me ek acchi kamai ker le rahe hai to jarur jaye lakin agar muskil se pet paal ker kam aamdani me gujar basar ker rahe hai to gaon ko chhor baaher jane k kya faida,berojgari k iss daur me nagdi aamdani ko lekar gaon ko chhorna parta hai agar aap gaon me nagdi aamdani jutane me asamartha hai,to kosish kare ki bagal k sahar jitna sambhav ho sake waha rahe
Mauli bhardwaj said…
jis jila me apka village hai jahan tak ho sake koshish kare ussi jila ke sahri area me rahe taaki gaao se bhi sampark banaa rahe aur jaha tak ho sake case ya police k chakker me na pade kosish kare ki samajik astar pe jamini bibaad,aapsi matved ka samjhota ho jaye

Popular posts from this blog

अंतर्जातीय विवाह की त्रासदी सुहैब इलियासी-अंजू मर्डर केस, सच्चाई जानेंगे तो चौंक जायेंगे

पत्नी अंजू की हत्या के मामले में सुहैब इलियासी दोषी,मिली उम्रकैद की सजा  खुलेपन के नाम पर अंतर्जातीय विवाह आम बात है. भूमिहार समाज भी इससे अछूता नहीं. लड़के और लड़कियां आधुनिकीकरण के नाम पर धर्म और जाति की दीवार को गिराकर अंतर्जातीय विवाह कर रहे हैं. लेकिन नासमझी और हड़बड़ी में की गयी ऐसी शादियों का हश्र कई बार बहुत भयानक होता है. उसी की बानगी पेश करता है अंजू मर्डर केस जिसमें 17साल के बाद कोर्ट का फैसला आया है और अंजू के पति सुहैब इलियासी को उम्र कैद की सजा का हुक्म कोर्ट ने दिया है. गौरतलब है कि अंजू इलियासी कभी अंजू सिंह हुआ करती थी और एक प्रतिष्ठित भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती थी.
सुहैब इलियासी और अंजू की कहानी - अंजू की मां रुकमा सिंह के मुताबिक़ सुहैब और अंजू की पहली मुलाकात 1989 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई थी. धीरे-धीरे दोनों अच्छे दोस्त बन गए और बात शादी तक जा पहुंची. अंजू के पिता डॉ. केपी सिंह को जब इस रिश्ते का पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया. लेकिन इसके बावजूद अंजू और सुहैब ने 1993 में लंदन जाकर स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर ली. इसके बाद अं…

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…