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ब्राह्मण समाज के राजनैतिक पुनर्जागरण का समय!


अरविंद रॉय -

ब्राह्मण समाज  उत्थान और जागृति 


ब्राह्मण समाज के उत्थान और जागृति के लिए। क्या किया जा सकता है जब ब्राह्मणों का राजनीतिक वर्चस्व खत्म होने जा रहा है। 
मित्रों, भारत असल में सिर्फ नाममात्र लोकतंत्र है। यह वोटतंत्र है। सँख्यातंत्र है। किसी भी जाति के उत्थान के लिए उसका एक गढ़ होना जरूरी है। जैसे राजपूतों का राजपुताना, जाटों की जाटलैंड, यादवों की यादव बहुल बेल्ट, पाटीदारों, मराठों का अपना बहुसंख्यक इलाका। इसी तरह ब्राह्मणों का पूर्वांचल और उत्तराखंड है। यह वो बेल्ट है जहां ब्राह्मणों की संख्या 2 करोड़ के आस पास है और कुल आबादी का 30% से अधिक है। पूर्वांचल भारत की राजनीति के नजरिये से बहुत अहम है। यहां लोकसभा की 40 से अधिक सीटें हैं। ठीक इसी तरह बंगाल में ब्राह्मणों की बड़ी संख्या है जहां 30 के आस पास लोक सभा सीटें हैं। जय परशुराम का नारा देने वाले सब ब्राह्मण हैं।

आज के राजनीतिक परिपेक्ष में बहुत जरुरत है एक ब्राह्मण बेल्ट के निर्माण की। पुर्वांचल और उत्तराखंड (जिसे पूर्वांचल से तोड़ दिया गया) में 50 से अधिक लोक सभा सीटें हैं और यहां ब्राह्मण वोट बड़ी ताकत हैं। ब्राह्मण चाहें तो यहां से लामबंद होकर वोटिंग करके किसी भी राजनीतिक पार्टी का खेल बना और बिगाड़ सकते हैं। पर क्या वजह है कि कभी 50% MP देने वाले ब्राह्मण आज 10% से भी कम संख्या में पार्लियामेंट में हैं?? उत्तरप्रदेश में तो ब्राह्मण मुख्यमंत्री आये 30 साल हो गए, जिस उत्तराखंड में हमेशा आता रहा वहां भी इस बार ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं बन पाया,क्यों?? ब्राह्मण गढ़ माने जाने वाली सीटों पर इस बार यूपी निकाय चुनाव में ब्राह्मण हार गए , क्यों?? क्यों ब्राह्मणों का राजनीतिक वर्चस्व लगातार गिर रहा है? क्यों कोई पार्टी ब्राह्मण हित की , ब्राह्मण वोटबैंक की बात नहीं करती??

इसका कारण है कि ब्राह्मण सब मुद्दों को लेकर वोट कर देते हैं। पर ब्राह्मण हित, ब्राह्मण आरक्षण कभी इनके दिमाग में नही आते। हिंदुत्व के ठेकेदार, राष्ट्रवाद के ब्रांड एम्बेसडर बने यह ब्राह्मण आरक्षण का विरोध करके दूसरी जातियों को शत्रु बना लेते हैं जबकि तमाम अन्य जातियां आज आरक्षण लेने के लिए संघर्ष कर रही हैं। आज जब ब्राह्मणों को आरक्षण की सबसे अधिक आवश्यकता है तब देश के टैलेंट की सबसे अधिक फिक्र ब्राह्मणों को ही है। संस्कृति के पहरेदार बने इन ब्राह्मणों के पास या तो रोजगार नहीं है या फिर उनकी काबलियत से बहुत नीचे का रोजगार है। सरकार की तरफ से एक भी स्कीम नहीं है। वहीं हिंदुत्व से इतर रहने वाले गोरखा ब्राह्मण आरक्षण लेते हैं, तेलंगाना, आंध्रा में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड बने हैं। हरियाणा पँजाब के ब्राह्मण इन मामलों में इस ब्रह्मनलैंड के ब्राह्मणों से कहीं जागृत है।

इसलिए पूर्वांचल और उत्तराखंड के ब्राह्मणों को वो जागृति लानी होगी जिससे वो पूरे देश के ब्राह्मणों की आवाज़ बन सकें। यहीं से ब्राह्मण आरक्षण और ब्राह्मण वोटबैंक की राजनीति का शंखनाद होगा। देख लेना ऐसा होगा तो 1857 के ब्राह्मण विद्रोह के बाद अंग्रेजों द्वारा बन्द की गई दोनों ब्राह्मण रेजीमेंटें फिर से बहाल होंगी। जब 50 लोक सभा सीटों का राजनीतिक भविष्य ब्राह्मण बनाएंगे तब यही ब्राह्मण विरोधी लालू, मोदी, अखिलेश , दलितों के मसीहा बने राहुल, केजरी, मायावती ब्राह्मण आरक्षण की बात करेंगे।

आप सबको सोशल मीडिया के जरिये ब्राह्मणों को जागृत करना होगा। ब्राह्मणों का इतिहास ब्राह्मण युवाओं को बताना होगा। ब्राह्मण कन्यायों को खासकर बच्चियों में ब्राह्मणत्व भरना होगा। दक्षिण भारत के ब्राह्मणों से अंग्रेज़ी समझने वाले भाई जुड़ें। उनकी आवाज़ उत्तर और पश्चिम भारत तक पहुंचाएं। उनकी भी अपनी समस्यांए हैं। परशुराम जयंती पर हर गली मोहल्ले शहर में अपने स्तर पर कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। ब्राह्मणों ने देश पर कब कब राज्य किया, कौन कौन से राजवंश और चक्रवर्ती सम्राट पैदा किये, आज़ादी के पहले और बाद में दी हुई कुर्बानियां पढ़ें और पढ़ाएं।

आओ 2018 में प्रण लें एक शाखाभेद विहीन, वर्णभेद विहीन, याचक अयाचक की सोच से परे ब्राह्मण समाज का निर्माण करेंगे
ना चितपावन की बात होगी, ना सारस्वत की न त्यागी की। बस जय परशुराम का नारा होगा। दक्षिण से उत्तर तक, पूर्व से पश्चिम तक हम ब्राह्मणों को एक करेंगे । दक्षिण भारत के ब्राह्मणों को अब साथ लाएंगे। वर्ष 2018 की परशुराम जयंती पर पूरे देश में ब्राह्मण सड़कों पर फरसे लिए जय परशुराम गूंजते दिखाई देंगे।
जय परशुराम

Comments

Mauli bhardwaj said…
Brahman ek nahi ho sakte wajah yah hai ki brahman aapas me bate hue hai bihar aur up me mathil brahman,kankubja brahman,bhumihar brahman,tyagi,bhattbrahman,saryupareen brahman aur mahapatra brahman per inke aapas me koi beti roti tak ka sambandh nahi chalta aur other brahmans and bhumihar ek ho jaye to bihar me yadav aur up me pura brahman samaj aur bhumihar aur tyagi ek ho jaye to waha bhi yadav se majboot ho jayange lakin aapsi matbhed ki wajah se aaj subse jyada vidwan aur shikchit hone k baad bhi ye stithi bani hui hai aur iske jimmewar brahman khud bane hue hai
Mauli bhardwaj said…
Jo brahman paaramparik taur pe purohiti chor chuke hai jaise bihar aur up me tyagi aur bhumihar ko jo ayachak brahman hai unhe ye other brahman group jo purohiti karte hai wo inhe brahman man ne me sankoh karte hai aur mahapatra brahman ko ashuvh maante hai aur neech samajhte hai kantaha kaha karte hai, yahi wajah hai kamjor parne ka aur sirf shikshit hote to thik tha iske sath ghamandh aur aapsai matved naas ka kaaran hai

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