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छोटे सरकार को मोकामा में ये देंगे कड़ी टक्कर!


शौर्य एस. सिंह -

भूमिहार बाहुल्य मोकामा विधानसभा क्षेत्र का चुनाव इस बार दिलचस्प होने वाला है। वर्तमान में यहां से बाहुबली अनंत सिंह विधायक हैं और उम्मीद की जा रही है कि अगली बार भी वे यही से ताल ठोकेंगे (अगर लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ते तो…) लेकिन इस बार उन्हें अन्य प्रत्याशियों से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है। मुख्यतः मोकामा में चार दिग्गजों के बीच टक्कर है। खास बात ये है ये सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि गद्दी की लड़ाई भी है।इसलिए 2020 के विधानसभा चुनाव में जोरदार मुकाबला होने की संभावना है जिसमें विजयी कौन होता है ये तो उसी वक़्त पता चलेगा।


1- अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार :

वर्तमान विधायक अनंत सिंह का मोकामा में दबदबा बदस्तूर जारी है।उनके प्रशंसक सोशल मीडिया पर उनके लिए लगातार कैम्पेन करते रहते हैं और वे काफी लोकप्रिय भी हैं।लेकिन ये लोकप्रियता ज़मीनी स्तर पर कितनी कारगर सिद्ध होगी कि ये देखना दिलचस्प होगा।कहा जाता है कि टाल क्षेत्र में उनकी जबरदस्त पकड़ है और उन्हीं के एकमुश्त वोटों के बदौलत वे चार बार से जीतते आ रहे हैं।लेकिन इस बार शायद ये इतना आसान नहीं होगा।फिर भी विश्लेषकों के फेवरेट वही हैं।आज भी जीत का प्रबल दावेदार उन्हें ही माना जा रहा है। 


वरिष्ठ समाजसेवी जीतेन्द्र कुमार सिंह कहते हैं - "जो व्यक्ति निर्दलीय चुनाव जीत सकता है वैसे व्यक्ति को किसी दल से लड़ने पर हराना आसान नहीं होगा।" 


लेकिन सौरव सिंह की राय इनसे बिल्कुल अलग है।वे कहते हैं -" माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी से सम्बन्ध सुधार की अपेक्षा पाल रखे अनन्त सिंह का निजी क्षेत्र में आरक्षण के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल पाना मोकामा विधानसभा के युवाओं में काफी रोष है।।आगामी विधानसभा चुनाव में इसकी वजह से उनको काफी मुश्किल उठाना पड़ सकता है।"

2- ललन सिंह उर्फ नलिनी रंजन शर्मा :
ये अनंत सिंह के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी बनकर उभरे हैं।पिछले कुछ समय से मोकामा में जनता के बीच सक्रिय भी रह रहे हैं।युवाओं के एक बड़े वर्ग का उन्हें समर्थन हासिल है।ये पहले की तरह फिर से मोकामा में कांटे की टक्कर दे सकते हैं।


3- कन्हैया कुमार सिंह :
ये पिछले चुनाव मे लोजपा के टिकट से राजग गठबंधन के उम्मीदवार थे। इन्हे टिकट इनके बड़े भाई  सुरजभान सिंह के बदौलत मिला था। इस बार भी के यहां से चुनाव लड़ सकते हैं।


4- नीरज कुमार (वर्तमान विधानपार्षद पटना,शिक्षाविद)
ये एक ऐसा चेहरा हे जो 2015 के विधानसभा चुनाव मे उभरा। इन्होने अंनत सिंह को कांटे की टक्कर दी और दूसरे नंबर पर रहे। उस वक़्त वे महागठबंधन के उम्मीदवार थे।


(ये लेखक का अपना विश्लेषण है।भूमंत्र का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं)

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