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 ऐश और कैश की राजनीति का तिलिस्म


राजीव कुमार-

देश में वर्तमान में चल रही ऐश और कैश की राजनीति का तिलिस्म और उसमें भटकते युवा वर्ग के लोग :

जमीनी सच्चाई से रू ब रू कराती समाजद्रष्टा सह स्वतंत्र राजनैतिक विश्लेषक  एवं ब्रह्मऋषि चिंतक " राजीव कुमार  " की देश के प्रबुद्ध एवं युवा वर्ग को समर्पित प्रस्तुति

देश में वर्तमान में राजनीति का जो दौर चल रहा है उसके दो पहलू हैं । एक है  ऐश  की राजनीति और दूसरी है कैश की राजनीति । दोनों ही राजनीति एक सिक्के के दो पहलू हैं । एक पार्टी जब सत्ता में आती है तो वह केवल युवाओं को उनके सुनहरे भविष्य को लेकर कोरे सपने दिखाती है और उनका मानसिक शोषण कर राजनीति करती है और सत्ता में रहकर ऐश करती है । जबकि दूसरी पार्टी जब सत्ता में आती है तो वो कैश की राजनीति करती है यानि कि वो पैसा कमाने में लग जाती है और इसी क्रम में बड़े बड़े घोटाले कर डालती है और देश के खज़ाने में जमकर सेंध लगाती है और लूट पाट करती है ।

दोनों ही परिस्थितियों में जो वर्ग शिकार हो रहा है वो है युवा वर्ग जो जीवन के शुरुआती सफर में सपने तो बड़े बड़े संजोता है लेकिन इन दो अलग अलग तरह की राजनीति करने वाले ग्रुप के निजी महत्वाकांक्षा के चक्कर में आखिरकार इनका मोहरा बनकर बर्बाद होता जा रहा है या दुसरे शब्दों में कहें तो इन राजनीतिक समूहों के फरेबी और झूठे राजनैतिक तिलिस्म का शिकार हो रहा है । 70 वर्ष आजादी के बीत जाने के बाद भी जातिवादी राजनीति को बढ़ाया जा रहा है ताकि परंपरागत रूप से लोग इन दो ध्रुवीय राजनेताओं का आसानी से शिकार हो सकें । इन राजनेताओं के तिलिस्मी जाल को और अधिक फैलाने में आजकल के paid media का बहुत ही बड़ा सहयोग रहता है जिनकी अनेकों दुकानें खुल चुकी हैं भिन्न भिन्न नामों के बैनर तले और इन दुकानों के सहारे बहुत ही अत्याधुनिक तरीके से बुद्धिजीवी लोगों और युवाओं को गुमराह किया जा रहा है और बड़ी ही आसानी से राज चलाने के मूल उद्देश्य एवं मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जाता है ताकि ये ऐश और कैश की राजनीति आसानी से चलती रहे और लोग गुलाम बनें रहें ।

विगत 27 साल में सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के वैश्विकरण के बाद सभी देश ने तरक्की की राह पर ऊँची ऊँची छलाँग लगाई क्योंकि वहाँ के राजनेताओं , वहाँ की मीडिया सबके पास अपने देश की सच्ची तरक्की को लेकर वैचारिक प्रतिबद्धता थी । लेकिन हमारे देश में कुछ राजनेताओं और उद्योगपतियों की मिलीभगत से उनके निजी हित को साधने की राजनीति जोर शोर से चली जिसका सिलसिला बरक़रार है और नतीजा जमीनी तरक्की के मामले में भारत बहुत ही पीछे छूट गया और आज भी यहाँ गरीबी और बेरोजगारी बरकरार है , बल्कि बेरोजगारी दिन दूना रात चौगूना बढ़ती जा रही है ।

आश्चर्य तो तब और होता है कि इस ऐश और कैश की राजनीति का पटाक्षेप करने और इसके खात्मे हेतु युवा लोग एकत्र नहीं हो पा रहे हैं और न ही कोइ वृहत आंदोलन इस दो ध्रुवीय राजनीति के खिलाफ शुरू हो रहा है ।

जब जब युवा वर्तमान ऐश और कैश की राजनीति के खिलाफ संगठित और एकमत होने का प्रयास करते हैं , उनको पहले से स्थापित राजनैतिक दलालों के द्वारा जात पात में विभक्त कर दिया जाता है और इसप्रकार अंग्रेजों वाली policy divide and rule ( बाँटो और राज करो ) के सहारे आजाद भारत में भी राज काज चलाया जा रहा है ।

कुलमिलाकर निष्कर्ष यही है कि युवाओं  एवं बुद्धिजीवियों का एक स्वतः स्फूर्त आंदोलन देश में मौजूद बेरोजगारी , भ्रष्टाचार , किसानों की समस्या के खिलाफ शुरू होना चाहिए जिससे ये ऐश और कैश की राजनीति करने वाले दोनों ही राजनीतिक वर्ग का पूर्ण सफाया हो सके और भारत में एक पूर्ण जनहित प्रेमी , स्वच्छ और युवाओं को समर्पित एवं युवाओं से प्रेरित सरकार सत्तासीन हो और भारत से गरीबी और बेरोजगारी दूर हो । परंपरागत और पहले से स्थापित राजनेताओं से ये देश और गर्त में समाता जाएगा क्योंकि वो सारे के सारे सत्तालोलुप और मलाई खाने वाले हैं । इनको देश और समाज से कोइ मतलब नहीं है ।

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