Skip to main content

आरक्षण से नहीं 'कृषि क्रांति' से बदलेगी भूमिहार समाज की दशा


कामेश्वर पांडेय-
वर्तमान समय में कृषि को व्यवसाय के समान मान कर इसमें लगना होगा | भूमि-पूंजी-साहस और धैर्य किसी भी व्यवसाय में प्रगति का मूल मंत्र हैं ! भूमिहारों के पास ये सारी खूबियॉ वर्तमान हैं-- लेकिन इनके संतुलित समायोजन के नहीं कर पाने या इसके प्रति सोच के अभाव के कारण पुरा का पुरा ब्रह्मर्षि समाज बेकारी, बेरोजगारी के चपेट में आकर मानसिक असंतुलन की स्थिति में है! भूमिहार नवयुवक वर्ग मानसिक विछोभ की स्थिति में थोड़े समय में ही बहुत कुछ पा कर ऐसपूर्ण जिन्दगी जीने की चाह में कुटीलतापूर्ण राजनीति तथा अपराध की ओर उन्मुख होने के मानसिक प्रेरणा से ग्रस्त है! पैत्रिक भूमि कर्म से तोे लगभग कट ही चुका है! भूमि कर्म से जुड़ी पुरानी पीढ़ी अपने पुराने संस्कारों से जुड़ी अल्प आय वाली या घाटे की कृषि कर्म से बंधी घर की वर्तमान पीढ़ी के अनुपयोगी व्यवहार से चिंतित किंकर्तव्यविमूढ की, ठहराव ही नहीं, अधोगति की स्थिति में है! ऊपर से वर्तमान में भूमिहारों के प्रति वैमनस्य भरी सामाजिक तथा राजनैतिक स्थिति आग में घी डालने के कार्य कर रही है | आधुनिकता के नाम पर गलत शिक्षा और सोच नयी पीढ़ी की बेड़ी बन चुकी है |

ऐसी भयानक स्थिति में भूमिहार के राजनितिग्य भी हमें सही राह दिखाने के बजाय स्वयं के स्वारथ की पूर्ति में आकंठ डूबे हुए प्रतीत हो रहे हैं तथा नई पीढ़ी को अपने स्वार्थ सिद्धि में 'युज' कर भटका भी रहे हैं ! 

ऐसी भयानक स्थिति में भी हमने अभी बहुत कुछ बचा कर रखा है, बहुत कम खोया है! लेकिन अब बहुत कुछ खो देने का खतरा सामने खड़ा नजर आरहा है! अतः इससे उबर कर बच निकलने का मार्ग हमें स्वयं ही खोजना होगा उसे जीवन कर्म में उतारना होगा! 
 क्रमश: ....

Comments

Mauli bhardwaj said…
krishi me aab purani baat nahi rahi ab 1 kattha dhan upjane me rs about 600 ka kharcha aata hai aur yahi haal dusre crops ka bhi hai aur to aur mausam bhi anukul nahi hai,pero ki katai aur sahrikaran hone se waqt per barish bhi nahi hoti hai uper se pahle baell se kheti ho jati thi per aab tractor chahiye aur bhi bahut kheti ki saman machinary ho gaya hai aab pahle jaise desi hal se aur gober se kheti karna sambhav nahi hai kyo ki pani patane k liye bhi pumping set chahiye itna paisa lagane k baad government hamari koi help nahi karti hai uper hamare anaj ki kimat bhi wo khud tay karti hai is hishaab se ki aam aadmi tak ye anaj aram se pahuch jaaye aur sarkar khud hamari anaj leti nahi nahi hai sahi rate per aur bpl wale ko rs2 ki rice aur rs3 ki wheat per kg de rahi hai aur kewal punjab aur hariyana itna anaj upjata hai ki shal bhar tak pure desh ko khila sake aur record k mutabik sabse jada yahi k kishan aatamhatya kar rahe hai,to sochne k jarurat hai ki kishaan kheti se muskil se apna pet bhar pate hai,wah apne bacche ko kaise padha piye aur apni dusari jarurat kaise pura kar sakenge,aur global warming k iss daur me wo dhup me kheto me kaise kaam kar sakenge aur apna mehnat bhi kheti k kharche me joor dene per phashal se prapt aamdani utni nahi hoti hoti hai ki uss me kisaan ko profit najar aaye aur jo kheti kar rahe hai wo majboori me kar rahe hai nahi to logo se aab kheti shambhav nahi hai aur wo isse chhor kar dusra kam chun rahe hai?

Popular posts from this blog

अंतर्जातीय विवाह की त्रासदी सुहैब इलियासी-अंजू मर्डर केस, सच्चाई जानेंगे तो चौंक जायेंगे

पत्नी अंजू की हत्या के मामले में सुहैब इलियासी दोषी,मिली उम्रकैद की सजा  खुलेपन के नाम पर अंतर्जातीय विवाह आम बात है. भूमिहार समाज भी इससे अछूता नहीं. लड़के और लड़कियां आधुनिकीकरण के नाम पर धर्म और जाति की दीवार को गिराकर अंतर्जातीय विवाह कर रहे हैं. लेकिन नासमझी और हड़बड़ी में की गयी ऐसी शादियों का हश्र कई बार बहुत भयानक होता है. उसी की बानगी पेश करता है अंजू मर्डर केस जिसमें 17साल के बाद कोर्ट का फैसला आया है और अंजू के पति सुहैब इलियासी को उम्र कैद की सजा का हुक्म कोर्ट ने दिया है. गौरतलब है कि अंजू इलियासी कभी अंजू सिंह हुआ करती थी और एक प्रतिष्ठित भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती थी.
सुहैब इलियासी और अंजू की कहानी - अंजू की मां रुकमा सिंह के मुताबिक़ सुहैब और अंजू की पहली मुलाकात 1989 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई थी. धीरे-धीरे दोनों अच्छे दोस्त बन गए और बात शादी तक जा पहुंची. अंजू के पिता डॉ. केपी सिंह को जब इस रिश्ते का पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया. लेकिन इसके बावजूद अंजू और सुहैब ने 1993 में लंदन जाकर स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर ली. इसके बाद अं…

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…